Re. No. MP-47–0010301

चार माह से ठंडा पड़ा है बहरी पीएचसी का किचन, प्रसूता महिलाओं से छीना गया भोजन का अधिकार

चार माह से ठंडा पड़ा है बहरी पीएचसी का किचन, प्रसूता महिलाओं से छीना गया भोजन का अधिकार

सीधी।
जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिहावल अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहरी में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को पिछले चार माह से भोजन और चाय-नाश्ता नसीब नहीं हो रहा है। कारण, अस्पताल का किचन पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।

राज्य सरकार ने जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को प्रसव के दौरान पोषक आहार एवं भोजन उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। लेकिन बहरी पीएचसी में चार माह से इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा। स्थिति यह है कि अस्पताल आने वाली महिलाओं को न तो भोजन मिल रहा है और न ही चाय-नाश्ता। यह सीधे-सीधे गरीब प्रसूताओं के अधिकारों का हनन है।

अस्पताल प्रशासन मौन, भ्रमण तक नहीं

स्थानीय लोगों का कहना है कि खंड चिकित्सा अधिकारी के पूर्व आदेशों के बावजूद आज तक किचन का चूल्हा नहीं जला। आश्चर्य की बात यह है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने इन चार महीनों में एक बार भी पीएचसी का भ्रमण कर यह देखने की जहमत नहीं उठाई कि महिलाओं को भोजन मिल भी रहा है या नहीं। सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदारों पर कार्यवाही होगी या उन्हें यूं ही बख्श दिया जाएगा।

स्व-सहायता समूह की दयनीय स्थिति

बहरी पीएचसी का किचन बंद होने का एक और बड़ा कारण सामने आया है। यहां भोजन की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रियंका स्व-सहायता समूह, देवरी का कहना है कि मार्च 2025 में उनका टेंडर खत्म हो गया। इसके बाद से ही भोजन की आपूर्ति बंद है।

समूह की अध्यक्ष प्रियंका ने बताया,
“हमें जून 2024 से मार्च 2025 तक प्रसूताओं को भोजन व चाय-नाश्ता उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया था। लेकिन मार्च से टेंडर खत्म हो गया और अब तक नवीनीकरण नहीं हुआ। इतना ही नहीं, हमारे समूह को अब तक एक वर्ष का भुगतान भी नहीं किया गया है। इसी कारण किचन पूरी तरह बंद पड़ा है।”

जननी महिलाओं और समूह दोनों की दुर्दशा

इस लापरवाही ने दो वर्गों को एक साथ प्रभावित किया है।

  • प्रसव हेतु आने वाली गरीब महिलाएं जिन्हें पोषण व आहार का अधिकार मिला हुआ है, वे इससे वंचित हैं।
  • और स्व-सहायता समूह, जिन्होंने वर्षभर तक निस्वार्थ सेवा दी, वे अब तक अपने मेहनताने के लिए भटक रहे हैं।

सवालों के घेरे में जिम्मेदार

जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम जैसी महत्वाकांक्षी योजना में इस प्रकार की लापरवाही सरकार की छवि को धूमिल कर रही है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब महिलाओं के पोषण और देखभाल के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तब आखिर बहरी पीएचसी जैसे अस्पतालों में किचन का चूल्हा क्यों ठंडा पड़ा है?

Leave a Comment

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!