सांसद पुत्र के आरोप पर स्वास्थ्य विभाग की सफाई
एआरटी पंजीयन विवाद में प्रशासन बनाम अस्पताल—कौन सही, कौन गलत?
सीधी।
जिले में एआरटी व सेरोगेसी क्लीनिक के पंजीयन को लेकर प्रशासन और निजी अस्पताल के बीच विवाद गहराता दिख रहा है। मंगलवार को सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के पुत्र और पुत्रवधू को कलेक्टर चेंबर के बाहर जनसुनवाई में बैठकर अपनी शिकायत दर्ज करानी पड़ी, तो वहीं बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर दिया। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों से मामला उलझता नजर आ रहा है।
मंगलवार: कलेक्टर चेंबर के बाहर सांसद पुत्र को इंतजार
मंगलवार दोपहर मिश्रा नर्सिंग होम एंड डायग्नोस्टिक फाउंडेशन के संचालक डॉ. अनूप मिश्रा और डॉ. बीना मिश्रा कलेक्टर से मिलने पहुंचे। मुलाकात में विलंब होने पर दोनों को आम नागरिकों की तरह चेंबर के बाहर लगी कुर्सियों पर काफी देर तक बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान मौजूद लोगों में चर्चा शुरू हो गई कि सांसद परिवार तक को अपनी ही सरकार में जनसुनवाई का सहारा लेना पड़ रहा है।
डॉ. अनूप मिश्रा ने बताया कि उन्होंने 20 दिसंबर 2022 को एआरटी व सेरोगेसी क्लीनिक के पंजीयन के लिए आवेदन किया था। दो लाख रुपये शुल्क और सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कराए जा चुके हैं। क्लीनिक का निरीक्षण भी किया जा चुका है, लेकिन लगभग तीन वर्ष बीतने के बाद भी न पंजीयन जारी हुआ और न कोई आधिकारिक पत्राचार हुआ। कलेक्टर से मुलाकात के बाद उन्हें आश्वासन मिला कि आगामी जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा।
बुधवार: स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण
एक दिन बाद बुधवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी हुआ। विभाग का कहना है कि एआरटी क्लीनिक के पंजीयन प्रकरण में कोई विभागीय कार्यवाही लंबित नहीं है।
विभाग के अनुसार वर्ष 2022 से संस्था को चिकित्सकों एवं स्टाफ के मूल पंजीयन तथा अर्हता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के लिए कई पत्र जारी किए गए, लेकिन आज तक संबंधित मूल अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। हाल ही में कलेक्टर द्वारा भी स्मरण पत्र भेजा गया है। विभाग का कहना है कि पंजीयन प्रक्रिया तभी आगे बढ़ सकेगी जब संस्था आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करेगी।
विभाग ने यह भी कहा कि इस विषय पर प्रकाशित कुछ समाचार बिना विभागीय जानकारी के अपूर्ण तथ्यों के आधार पर छपे हैं, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई।
कौन सही—कौन गलत? मामला उलझा
एक ओर अस्पताल संचालक दावा कर रहे हैं कि सभी दस्तावेज और फीस समय पर जमा कर दी गई है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग यह कह रहा है कि मूल दस्तावेज अभी तक नहीं दिए गए।
दोनों पक्षों के दावों के विपरीत दिशा में जाने से मामला और जटिल बन गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि—
- क्या वास्तव में दस्तावेज अधूरे हैं?
- या प्रशासनिक स्तर पर कहीं देरी हुई है?
- आने वाली जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में मामला सुलझेगा या विवाद और गहराएगा?
अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें
कलेक्टर द्वारा दिए गए आश्वासन और विभाग की आधिकारिक सफाई के बाद अब पूरा मामला अगले निर्णय की प्रतीक्षा में है। जिले में चर्चा है कि यह प्रकरण अब केवल पंजीयन विवाद नहीं, बल्कि प्रशासन और सांसद परिवार से जुड़े एक सम्मानित संस्थान के बीच खींचतान का रूप ले चुका है।
जनता की निगाहें अब जिला स्वास्थ्य समिति की अगली बैठक पर टिक गई हैं, जहां से इस प्रकरण का अगला अध्याय तय होगा।








