Re. No. MP-47–0010301

दक्षिण कोरिया ने कहा कि सुरक्षा वार्ताएँ यू.एस. के साथ कूपांग जांच से जोड़ी नहीं जानी चाहिए

South Korea says security talks with U.S. should not be linked to Coupang probe

सेओल। दक्षिण कोरिया की सरकार ने अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें दावा किया गया था कि वाशिंगटन ने कूपांग के ग्राहक जानकारी लीक मामले में सुरक्षा वार्ताओं को रोकने की धमकी दी है जब तक कि दक्षिण कोरियाई पक्ष कंपनी के अध्यक्ष किम बॉम की सुरक्षा के लिए कानूनी गारंटियां न दे।

दक्षिण कोरिया की अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा वार्ताओं को किसी भी व्यावसायिक जांच से जोड़ना अनुचित और अव्यावहारिक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों पक्षों के बीच सुरक्षा सहयोग बड़े स्तर पर द्विपक्षीय हितों के तहत संचालित होता है और यह किसी एक कंपनी के व्यवस्थित मुद्दे से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वाशिंगटन ने कूपांग के डेटा लीक मामले की जांच के दौरान कंपनी के अध्यक्ष की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी गारंटी मांगी थी। हालांकि, दक्षिण कोरियाई सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि वह इस मामले में अपनी जांच स्वतंत्र रूप से करेगी और किसी विदेशी दबाव से प्रभावित नहीं होगी।

कूपांग, जो दक्षिण कोरिया की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक है, हाल ही में ग्राहक जानकारी लीक होने की समस्या से जूझ रही है। इस मामले की जांच जारी है और दक्षिण कोरियाई उपभोक्ता अधिकार संगठन भी इस पर नजर बनाए हुए हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता के मामले में सरकारों और कंपनियों के बीच सहयोग अनिवार्य है, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि किसी भी जांच या कानूनी कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा वार्ताओं के साथ जोड़कर राजनीतिकरण न किया जाए।

इस विषय पर पर्यवेक्षक यह भी मानते हैं कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच सुरक्षा संबंध बहुत मजबूत हैं और दोनों देश विभिन्न मंचों पर सामरिक सहयोग जारी रखने के पक्ष में हैं। अत: इस तरह के मुद्दों को द्विपक्षीय वार्ताओं से अलग रखा जाना चाहिए ताकि दोनों देशों के बीच भरोसेमंद और स्थायी संबंध बनाए रखे जा सकें।

अंततः, दक्षिण कोरिया की सरकार ने मीडिया को स्पष्ट संकेत दिया है कि वह कूपांग जांच में आत्मनिर्भर होकर काम करेगी और किसी विदेशी दबाव में आए बिना कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया को सुनिश्चित करेगी। यह भी स्पष्ट किया गया कि सुरक्षा वार्ता एक उच्च स्तरीय राजनीतिक एवं सामरिक मुद्दा है, जिसकी पृष्ठभूमि अलग है और उसे सर्वथा उसी रूप में बनाए रखना चाहिए।

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