मुंबई, 27 अप्रैल: देश में ‘आमों का राजा’ कहे जाने वाले अल्फांसो आमों की पैदावार व विपणन के क्षेत्र में इस वर्ष संकट गहराता जा रहा है। महाराष्ट्र के विशेष रूप से रत्नागिरी और कणकवली जिलों में उगने वाले इस मीठे और खुशबूदार आम की फसल पिछली कई फसलों के मुकाबले कम होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, मौसमी बदलाव और बीमारियों ने इसकी पैदावार पर गंभीर प्रभाव डाला है जिससे किसानों के सामने आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई है।
राज्य सरकार और कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बार फसल प्रभावित होने के पीछे मुख्य कारण देर से आए मानसून और अनियमित वर्षा है। इससे फूलों की संख्या कम हुई और फल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है। इसके अतिरिक्त, फल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों का प्रकोप भी ज्यादा हुआ है जिसने किसानों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
आम उद्योग से जुड़े व्यापारी तथा निर्यातक भी इस संकट के कारण चिंता में हैं क्योंकि अल्फांसो आम की मांग विश्वभर में बहुत अधिक है। निर्यात में कमी से देश की विदेशी मुद्रा आय प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। पिछले वर्षों की तुलना में कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जो उपभोक्ताओं और व्यापार दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर रहा है।
किसानों का कहना है कि वे उचित मुआवजे और सरकारी सहायता की अपेक्षा करते हैं ताकि वे इस नुकसान को कम कर सकें। वर्तमान हालात में कई किसान आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं और वे बेहतर प्रशिक्षण व खेती के आधुनिक तरीकों की भी मांग कर रहे हैं जिससे फसल को बेहतर बनाया जा सके।
सरकार की ओर से भी इस संकट को स्वीकारते हुए अनेक योजनाएं शुरू की जा रही हैं जो अल्फांसो आम किसानों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम में सुधार होता है और उचित प्रबंधन किया जाता है तो आने वाले मौसम में आमों की स्थिति सुधर सकती है।
इस संकट के बीच उपभोक्ताओं को भी स्थानीय और मौसमी फलों को प्राथमिकता देनी चाहिए। अल्फांसो आम की लोकप्रियता देश में हर वर्ष बढ़ रही है, इसलिए इस संकट को मिलकर समाधान ढूंढना आवश्यक है ताकि ‘आमों का राजा’ फिर से अपनी पहचान और बाज़ार में छवि कायम रख सके।








