नई दिल्ली: हाल के चार महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय इक्विटीज़ से लगभग ₹1.9 लाख करोड़ की बड़ी निकासी की है, और यह प्रवृत्ति लगातार जारी है। वित्तीय बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक दबाव के चलते निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित संपत्तियों की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की इस निकासी का मुख्य कारण बढ़ती वैश्विक मुद्रास्फीति, ब्याज दरों में वृद्धि और अर्थव्यवस्थाओं में धीमी वृद्धि का अनुमान है। इसके साथ ही, भारत में भी महंगाई और सरकारी नीतियों को लेकर अनिश्चितता ने बाजार में तनाव बनाए रखा है।
इसके मद्देनजर, निवेशक अब परंपरागत रूप से सुरक्षित माने जाने वाले विकल्पों जैसे बांड, सोना और वस्तुओं (कमोडिटी) की ओर बढ़ रहे हैं। सोना अपनी महंगाई-रोधी प्रकृति के कारण निवेशकों का प्रिय संपत्ति बन चुका है, जबकि सरकार द्वारा जारी किए गए बॉन्ड स्थिर आय का भरोसा देते हैं। वस्तुओं में कृषि उत्पाद और कच्चे तेल जैसे विकल्पों को भी तेजी से आकर्षण मिल रहा है।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों का यह रूझान वित्तीय बाजार की अनिश्चितता को दर्शाता है। भारतीय इक्विटी बाजार में निकासी लंबे समय तक निवेश के लिए चुनौतीपूर्ण संकेत हो सकता है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
सरकारी अधिकारियों और नीति निर्माताओं को भी बाजार की इस स्थिति पर नजर रखने और निवेशकों के विश्वास को बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की ज़रूरत है। इस बीच, निवेशकों को विविधता युक्त पोर्टफोलियो बनाकर जोखिम से बचने का सुझाव दिया जा रहा है।
निष्कर्षतः, विदेशी निवेशकों की निकासी से भारतीय इक्विटी बाजार प्रभावित हो रहा है, लेकिन बांड, सोना और अन्य वस्तुओं में बढ़ती निवेश रुचि यह संकेत देती है कि निवेशक अस्थिरता के बीच सुरक्षित संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।








