नई दिल्ली। अमेरिका में H-1B वीज़ा पर काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी को लेकर हाल ही में चर्चा तेज हो गई है। विशेष रूप से सिलिकॉन वैली और डलास जैसे प्रमुख टेक हब में सैकड़ों हजार डॉलर से ऊपर की सैलरी होने के बावजूद, वहां काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों के वेतन को सुधारने के लिए ट्रंप प्रशासन ने नई योजना बनाई है। यह कदम मुख्य रूप से उन टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स के लिए उठाया गया है जो H-1B वीज़ा के तहत अमेरिका में काम करते हैं।
सिलिकॉन वैली जहां औसतन $162,000 की वेतन होती है, वहीं डलास में यह करीब $113,000 है। ट्रंप प्रशासन का उद्देश्य है कि विदेशी विशेषज्ञों को अमेरिकी कर्मचारियों के बराबर उचित वेतन और सम्मान मिले। इसके लिए कुछ नई नीतियों पर विचार किया जा रहा है जो इस श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन को बढ़ावा देंगी।
अमेरिकी श्रम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार H-1B वीज़ा धारकों की सैलरी में व्यापक अंतर होता है, और कभी-कभी ये वेतन अमेरिकी कर्मचारियों के मुकाबले कम होते हैं, जिससे रोजगार बाजार में असमानता उत्पन्न होती है। ट्रंप प्रशासन इस असंतुलन को दूर करने के लिए नियमों में बदलाव करने की योजना बना रहा है ताकि तकनीकी क्षेत्र में अमेरिकी और विदेशी वर्कर्स के बीच वेतन में पारदर्शिता और समानता लाई जा सके।
इस योजना के तहत संभावित कदमों में अधिकतम वेतन सीमाएं तय करना, कंपनियों को सैलरी संरचना घोषित करनी अनिवार्य करना और श्रम बाजार के नियमों को कड़ा बनाना शामिल है। इसके अलावा, सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि H-1B वीज़ा का दुरुपयोग न हो और केवल योग्य और प्रमाणित टैलेंट को ही यह सुविधा मिले।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह योजना प्रभावी रूप से लागू होती है, तो इससे अमेरिकी टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाले विदेशी विशेषज्ञों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, इससे भारतीय तथा अन्य देशों के पढ़े-लिखे युवक जो अमेरिका में अवसर तलाश रहे हैं, उन्हें भी निष्पक्ष अवसर मिलेंगे।
हालांकि, इस योजना को लेकर कुछ कंपनियों ने अपने विचार भी व्यक्त किए हैं। उनका मानना है कि वेतन पर कड़े नियम लागू करने से छोटे और मध्यम तकनीकी उद्यमों को नुकसान पहुंच सकता है, क्योंकि वे अपने बजट के अनुरूप कर्मचारियों को कमा पाने में असमर्थ हो सकते हैं। इसलिए, नीति निर्धारकों को संतुलन बनाए रखना होगा ताकि तकनीकी उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहे।
ट्रंप प्रशासन की यह नई पहल यह दर्शाती है कि अमेरिकी सरकार विदेशी विशेषज्ञों के अधिकारों और वेतन सुरक्षा के प्रति गंभीर है। आगे आने वाले महीनों में इस योजना के संबंध में और विवरण सामने आने की संभावना है, जो H-1B वीज़ा धारकों और तकनीकी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।








