नई दिल्ली। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान बताया कि सरकार ने किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया है। उन्होंने बताया कि सभी 14 फसलों के लिए एमएसपी लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक निर्धारित की गई है ताकि किसानों को उत्पादन लागत से बेहतर आमदनी मिल सके।
मंत्री ने कहा, “हमने सभी 14 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य ऐसी दर से निर्धारित किया है जिससे किसानों को उनके उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक कीमत मिले। यह कदम किसानों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है।”
सरकार ने इस वर्ष धान की कीमत 72 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है। वहीं, सूरजमुखी के बीज में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है, जिसकी कीमत 622 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाई गई है। इससे किसानों को खासा लाभ होगा। यह निर्णय उन किसानों के लिए राहत भरा साबित होगा जो इन फसलों की खेती करते हैं।
एमएसपी का यह निर्धारण पिछले वर्ष की तुलना में उत्पादन लागत और बाजार की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। मंत्री ने बताया कि इस बार मैंने एमएसपी में बढ़ोतरी पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि खेती व्यवसाय को प्रतिस्पर्धी और लाभकारी बनाया जा सके। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
वहीं, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि एमएसपी में इस तरह की बढ़ोतरी निश्चित रूप से किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करेगी और उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को एमएसपी के साथ-साथ बेहतर खरीद नीति और समर्थन संरचना भी सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि वैश्विक बाजार में भारतीय किसानों की स्थिति मजबूत बनी रहे।
मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार किसानों को नई तकनीकों और उन्नत खेती के तरीकों से अवगत कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में सुधार हो। इस दिशा में कृषि मंत्रालय के साथ मिलकर कई योजनाएं लागू की जा रही हैं।
कुल मिलाकर, इस बार की एमएसपी वृद्धि किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। यह कदम भारत सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो वह देश के कृषि क्षेत्र के सतत विकास के लिए लागू कर रही है। इससे न केवल किसानों को सीधे लाभ मिलेगा, बल्कि भारतीय कृषि बाजार में स्थिरता और समृद्धि भी आएगी।








