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Sidhi:सस्ती शराब, महंगी पड़ गई!

सस्ती शराब, महंगी पड़ गई! शराब पकड़वाने में माफिया आगे, पुलिस पीछे?

कुसमी– सीधी जिले के कुसमी थाना क्षेत्र में शराब पकड़ने की एक कार्रवाई इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। मामला जितना सीधा दिखाई दे रहा है, उतने ही टेढ़े सवाल इसके पीछे खड़े नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों के बीच चर्चा है कि यह कार्रवाई पुलिस की सतर्कता का परिणाम थी या फिर शराब कारोबार की अंदरूनी प्रतिस्पर्धा का साइड इफेक्ट।

बताया जा रहा है कि टमसार क्षेत्र का एक ढाबा संचालक शुक्रवार रात सीधी से विशेष वाहन में शराब लेकर लौट रहा था। शराब कथित रूप से स्थानीय स्रोतों की बजाय सस्ते दाम पर सीधी से खरीदी गई थी। लेकिन जैसे ही इस “व्यापारिक नवाचार” की भनक क्षेत्र में सक्रिय शराब कारोबारियों को लगी, उन्होंने कथित तौर पर घेराबंदी कर दी और मामले की सूचना पुलिस को दे दी।

इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची, शराब जब्त की और आरोपी को थाने ले गई। लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट यहीं से शुरू होता है। जिस वाहन में शराब लाई जा रही थी, वह आखिर कहां गया? यदि शराब वाहन से आई थी तो वाहन जब्त क्यों नहीं हुआ? बरामदगी की पूरी प्रक्रिया का सार्वजनिक विवरण क्यों नहीं आया? यही सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शराब की मात्रा इतनी थी कि कार्रवाई करनी पड़ी, तो परिवहन में प्रयुक्त वाहन भी जांच और जब्ती का हिस्सा होना चाहिए था। वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि शराब की पैकिंग खोलकर मौके पर वीडियो रिकॉर्डिंग या अन्य दस्तावेजी प्रक्रिया नहीं किए जाने से भी संदेह की गुंजाइश बनी हुई है।

बिना मेहनत का फल या शानदार सूचना तंत्र?

स्थानीय चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि ढाबा संचालक लंबे समय से शराब कारोबार से जुड़ा हुआ था, लेकिन कभी कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई। इस बार गलती शायद सिर्फ इतनी हुई कि उसने स्थानीय सप्लाई चैन को दरकिनार कर सस्ती शराब खरीदने का प्रयास कर लिया।

लोग व्यंग्य में कह रहे हैं कि “शराब माफिया ने मेहनत से माल पकड़ा और पुलिस ने मेहनत से कागजी कार्रवाई कर दी।” हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में ऐसी चर्चाएं खूब चल रही हैं।

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सवाल अभी भी बाकी हैं

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शराब की खेप वाहन से लाई जा रही थी तो वाहन कहां गया? क्या चालक की पहचान हुई? क्या परिवहन के पूरे नेटवर्क की जांच की जाएगी? और यदि सूचना इतनी सटीक थी तो सूचना देने वालों की भूमिका क्या थी?

फिलहाल पुलिस ने अपने स्तर पर कार्रवाई कर ली है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल छोड़ दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जांच इन सवालों के जवाब तलाशती है या यह मामला भी क्षेत्र की चाय दुकानों और चौपालों की चर्चाओं तक ही सीमित रह जाता है।

https://sidhi24news.in/archives/29707

(नोट: उपरोक्त समाचार विशेष सूत्रों,स्थानीय चर्चाओं और  ग्रामीणों  से प्राप्त दावों पर आधारित है। संबंधित आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।)

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