नई दिल्ली। अमेरिका की तकनीकी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों द्वारा समर्थित एक व्यवस्था को लेकर विवाद छिड़ गया है, जिसमें कांग्रेस सदस्य राइली ने गृहमंत्रालय (DHS) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने Optional Practical Training (OPT) कार्यक्रम को समाप्त करने की मांग की है, और दावा किया है कि इस कार्यक्रम के कारण लगभग 4,50,000 अमेरिकी नौकरीपेशों को खो चुके हैं। यह कदम अमेरिका के घरेलू रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
OPT एक ऐसी योजना है, जो उच्च शिक्षा प्राप्त विदेशी छात्रों को अमेरिका में सीमित अवधि के लिए रोजगार करने की अनुमति देती है। इसके तहत विदेशी छात्र अमेरिका में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद व्यावसायिक अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, इस योजना के पक्ष और विपक्ष दोनों की आवाजें उठी हैं।
सांसद राइली ने अपने पत्र में कहा है कि OPT कार्यक्रम के चलते अमेरिकी नागरिकों के लिए उपलब्ध नौकरियों की संख्या काफी कम हो गई है। उनका मानना है कि विदेशी छात्रों को अस्थायी नौकरी मिलने से अमेरिकी युवा बेरोजगार हो रहे हैं। उन्होंने DHS से आग्रह किया है कि इस कार्यक्रम को समाप्त कर घरेलू बेरोजगारी को कम करने पर ध्यान दिया जाए।
वहीं, बड़ी तकनीकी कंपनियां इस योजना का समर्थन करती हैं और इसे रोजगार बाजार में विविधता और कौशल की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानती हैं। उनका तर्क यह है कि OPT से बहुत से कुशल विदेशियों को रोजगार मिलता है, जो अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक ताकत को मजबूत बनाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि OPT कार्यक्रम का निराकरण एक जटिल मुद्दा है। यह न केवल विदेशी छात्रों के लिए रोजगार के अवसर घटाएगा, बल्कि टेक कंपनियों को भी वैश्विक प्रतिभाओं की आपूर्ति में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, घरेलू रोजगार पर इसके प्रभाव का आकलन भी सावधानी से करना जरूरी है।
अमेरिकी संसद में इस मुद्दे पर गहन चर्चा चल रही है। कुछ सदस्य OPT के पक्ष में हैं, जबकि कुछ इसको समाप्त करने की वकालत कर रहे हैं। सरकार के अगले कदम और नीति निर्धारण पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह निर्णय अमेरिकी रोजगार बाजार और शैक्षणिक माहौल दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
अमेरिका के रोजगार बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और विदेशी छात्रों की भूमिका को लेकर यह बहस समय की मांग है। इस फैसले से केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी उद्योग और शिक्षा क्षेत्र भी प्रभावित होंगे। इसलिए, सभी पक्षों को संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा ताकि किसी भी प्रकार की आर्थिक या सामाजिक असंतुलन पैदा न हो।








