मुंबई। वर्ष के सबसे पसंदीदा फल अल्फ़ांसो आम को लेकर इस बार किसानों और विक्रेताओं की चिंता बढ़ती जा रही है। ‘आमों का राजा’ कहे जाने वाले इस फलों की कटाई और बिक्री के मौसम में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं, जिससे इसका उत्पादन और बाजार प्रभाव दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
अल्फ़ांसो आम की कटाई महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और गोवा के कुछ विशेष क्षेत्रों में होती है। लेकिन इस बार मौसम की अनियमितता, कम बारिश और बढ़ती कीट समस्या ने उत्पादन को काफी कम कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसमी फल की गुणवत्ता और उपज पर मौसमी बदलावों का सीधा असर पड़ रहा है, जो कि किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
किसान बताते हैं कि इस वर्ष रात के तापमान में उतार-चढ़ाव और अधिक नमी के कारण फल जल्दी खराब हो रहे हैं। साथ ही, कीट प्रबंधन के लिए उचित उपाय न होने के चलते उपज में काफी कमी आई है। वहीं कीमतों के मामले में, बाजार में महंगाई को देखते हुए आम की कीमतें पिछले वर्षों से कहीं अधिक हो गई हैं, जिससे आम की पहुंच आम उपभोक्ताओं तक सीमित हो रही है।
विपणन विशेषज्ञों का मानना है कि अल्फ़ांसो आम की बढ़ती कीमतों के पीछे मांग और आपूर्ति का असंतुलन मुख्य कारण है। निर्यातकों को भी इस कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
सरकारी अधिकारियों ने इस संकट को हल्का करने के लिए किसानों को नई तकनीकों और कीट प्रबंधन के उपायों की जानकारी देने के साथ-साथ बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, किसानों के लिए वित्तीय सहायता और बीमा योजनाओं को भी बेहतर बनाने की तैयारी चल रही है।
अल्फ़ांसो आम के इस संकट का समाधान निकाले बिना न केवल किसान बल्कि उपभोक्ता और व्यापक रूप से आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उम्मीद है कि उचित कदम जल्द उठाए जाएंगे जिससे ‘आमों के राजा’ की शान बनी रहे।
यही समय है कि हम इस कीमती फल की सुरक्षा और संवर्धन के लिए सभी स्तरों पर सहयोग करें और किसानों की सहायता करें ताकि आने वाले वर्षों में अल्फ़ांसो आम की कटाई में कोई बाधा न आए।








