संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर गर्मी फंसाने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए जो राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं सामने आई हैं, वे इस सदी में वैश्विक तापमान वृद्धि को 2.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रख पाएंगी। हालांकि यह प्रयास महत्वपूर्ण है, लेकिन यह 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य से काफी दूर है, जो गंभीर जलवायु प्रभावों को टालने के लिए आवश्यक माना जाता है।
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कहा है कि बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैलाने वाले देश, जो इस जलवायु संकट के मुख्य जिम्मेदार हैं, उन्हें अब और तेजी से तथा गहरे स्तर पर उत्सर्जन कटौती करने की जरूरत है। इसका उद्देश्य इस सदी के अंत तक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना है ताकि पृथ्वी को विनाशकारी जलवायु प्रभावों से बचाया जा सके।
विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान राष्ट्रीय नीतियां और प्रस्तावित कटौती उपाय समुचित नहीं हैं। वे कहते हैं कि यदि वर्तमान गति जारी रही, तो ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का स्तर बढ़ना, अनियमित मौसम की स्थिति, अत्यधिक गर्मी की घटनाएं, और जैव विविधता का नुकसान जैसी गंभीर समस्याएं और गहराएंगी।
दुनिया भर के देशों ने हाल ही में उत्सर्जन कम करने की नई प्रतिबद्धताएं की हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि यह अभी भी पर्याप्त नहीं है। प्रदूषण के मुख्य स्रोतों में बिजली उत्पादन, औद्योगिक गतिविधियां, परिवहन और कृषि शामिल हैं। इसीलिए, इन क्षेत्रों में ज्यादा प्रभावी नीतियां और योजना बनाना आवश्यक है।
जलवायु विशेषज्ञों ने सभी राष्ट्रों, विशेषकर प्रमुख विकसित और विकसित होते देशों, से अपील की है कि वे उत्सर्जन कम करने के अपने लक्ष्य को और कठोर बनाएं और तत्काल कार्रवाई करें। साथ ही, साफ ऊर्जा स्रोतों को अपनाने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और टिकाऊ विकास की दिशा में कदम बढ़ाने की आवश्यकता है।
संयुक्त राष्ट्र का यह चेतावनी संदेश स्पष्ट करता है कि वैश्विक तापमान को नियंत्रित करना और संतुलित करना अब समय की सबसे बड़ी चुनौती है। सभी देशों को एकजुट होकर तेजी से और समन्वित प्रयास करने होंगे, तभी हम पर्यावरण की गंभीर तबाही से बच पाएंगे।








