नई दिल्ली: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने आज बताया कि घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विमान संचालन के लिए एटीएफ और थोक डीजल की कीमतों में वृद्धि की गई है। इसके साथ ही, थोक और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में संशोधन किया गया है।
IOC के अनुसार, घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतें स्थिर रखी गई हैं ताकि घरेलू विमानन क्षेत्र को आर्थिक स्थिरता प्रदान की जा सके। वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले ATF की कीमतों में वृद्धि मुख्य रूप से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के कारण की गई है। थोक डीजल की कीमतों में भी इसी प्रकार की वृद्धि हुई है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय संचालन और भारी वाहनों पर पड़ेगा।
एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में संशोधन, खासकर थोक और व्यावसायिक सिलेंडरों के दामों को बढ़ाया गया है, ताकि घरेलू एवं वाणिज्यिक मांगों का समुचित प्रबंधन किया जा सके। घरेलू उपयोग के एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम उपभोक्ता को राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि थोक और व्यावसायिक ईंधन की कीमतों में यह वृद्धि बाजार की मौजूदा परिस्थिति और आपूर्ति श्रृंखला के दबावों को दर्शाती है। वहीं, घरेलू उड़ान परिचालन में ATF की कीमतों को स्थिर रखना विमानन क्षेत्र के साथ-साथ यात्रियों के लिए भी राहत भरा कदम है।
पूर्व में, तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण एटीएफ, डीजल और LPG में नियमित संशोधन किया करता था, जो ईंधन की मांग और वैश्विक बाजार की स्थितियों पर निर्भर करता था। IOC ने यह भी बताया कि उन्होंने उपभोक्ताओं पर अत्यधिक बोझ न पड़ने देने के लिए कीमतों को संतुलित करने की पूरी कोशिश की है।
इस कदम से घरेलू हवाई यात्रा सस्ती बनेगी और एयरलाइंस को आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रभाव पड़ने से शुल्क दरों में संभावित वृद्धि हो सकती है, जिसे एयरलाइंस को अपने संचालन में समायोजित करना होगा।
इस प्रकार, IOC के इस निर्णय का असर विमानन उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग होगा, लेकिन घरेलू यात्रियों को फिलहाल इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की स्थिर दरें उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर हैं, जबकि व्यावसायिक ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से उद्योग जगत में कुछ हद तक दबाव महसूस होगा।
IOC ने इस अपडेट के साथ ही उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे ईंधन की सही मात्रा का उपयोग करें और ऊर्जा बचत के उपाय अपनाएं ताकि संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। सरकार और तेल कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आवश्यकतानुसार आगामी महीनों में फ्यूल रेट्स में बदलाव कर सकती हैं।








