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विश्व में खतरनाक गर्मी की ओर तेजी, उत्सर्जन स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर: संयुक्त राष्ट्र

World on track to dangerous warming as emissions hit record high: UN

संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को चेतावनी दी कि वैश्विक गर्माई को 2.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए देश लगातार बड़े स्तर पर उत्सर्जन कम करने के राष्ट्रीय प्रतिबद्धता कर रहे हैं, लेकिन यह लक्ष्य पृथ्वी की जलवायु को विनाशकारी प्रभावों से बचाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

रिपोर्ट में बताया गया कि जो देश और क्षेत्र जलवायु संकट के मुख्य जिम्मेदार हैं, उन्हें अपने उत्सर्जन में तेजी से और गहरा कटौती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है ताकि इस शताब्दी के अंत तक वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित किया जा सके।

यूएन की इस चेतावनी से संकेत मिलता है कि वर्तमान में किए गए वादे और योजनाएं वैश्विक तापमान में असाधारण वृद्धि को रोकने के लिए अपर्याप्त हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वृद्धि से आपदा की स्थिति बन सकती है, जिसमें समुद्र का स्तर बढ़ना, चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि, और पारिस्थितिक तंत्रों का विघटन शामिल है।

विश्व का अधिकांश उत्सर्जन विकसित और बड़े उद्योग वाले देश कर रहे हैं, जिन्हें अब और अधिक जिम्मेदारी लेकर कार्य करना होगा। जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय समझौते जैसे पेरिस समझौता भी यही लक्ष्य निर्धारित करते हैं कि तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखा जाए।

विश्लेषकों के अनुसार, अगर उत्सर्जन कटौती की गति धीमी रही तो इससे जुड़े प्रभाव बेहद गंभीर हो सकते हैं, जो जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित करेंगे। इसमें खाद्य सुरक्षा, जल संसाधन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, और जैव विविधता पर खतरा बढ़ जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र की इस नवीनतम रिपोर्ट ने विश्व समुदाय के सामने एक चुनौती रखी है कि वे अधिक कठोर और शीघ्र नीतिगत फैसले लें, साथ ही अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, और प्रवर्तन के लिए निवेश को बढ़ावा दें। इसके बिना वैश्विक तापमान वृद्धि को सुरक्षित स्तर तक सीमित रखना सम्भव नहीं होगा।

निष्कर्षतः, यह आवश्यक है कि सभी देश मिलकर गंभीरता से जलवायु संकट से निपटें और तुरंत प्रभावी कदम उठाएं ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्थायी वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

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