अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े गोल्ड वीजा योजना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। हाल ही में इमिग्रेशन अटॉर्नी ने इस योजना को ‘अनैतिक’ बताते हुए इस पर सवाल उठाए हैं। वे दावा कर रहे हैं कि इस वीजा प्रोग्राम के तहत कोई भी निवेशक या अधिकारी इस गोल्ड वीजा को खरीदने में उत्साहित नहीं है।
इस विवाद की जड़ में है ट्रंप प्रशासन द्वारा शुरू की गई यह वीजा योजना, जिसे ईबी-5 वीजा भी कहा जाता है। इस योजना के तहत विदेशी निवेशक अमेरिका में बड़ी राशि निवेश करके स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन ट्रंप के समय इस योजना में जो बदलाव किये गए थे, उन्हें लेकर कई विशेषज्ञ असहमत हैं।
इमिग्रेशन कानूनों में पारंगत कई वकीलों का मानना है कि ट्रंप की गोल्ड वीजा योजना में नैतिकता का अभाव है। उनका कहना है कि यह वीजा सामान्य नियमों से हटकर केवल आर्थिक लाभ के उद्देश्य से तैयार की गई है, जो कि बड़ी संख्या में योग्य और योग्य निवेशकों की बजाय अमीर ब्रिटेन, रूस, चीन जैसे देशों के निवेशकों को लाभ पहुंचाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
साथ ही, विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि इस तरह के वीजा प्रोजेक्ट में पारदर्शिता की कमी है, जिससे वीजा बिक्री की प्रक्रिया में न्याय नहीं हो रहा और सामान्य आवेदकों के लिए बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। इससे न केवल अमेरिका के इमिग्रेशन सिस्टम की छवि प्रभावित हो रही है बल्कि विदेशी निवेशकों के बीच भी इस योजना पर भरोसा कम होता जा रहा है।
इमिग्रेशन वकील अली खान ने बताया, “ऐसे वीजा प्रोग्राम जिनमें वित्तीय लाभ को नैतिकता के ऊपर रखा जाता है, वे लंबे समय में देश के हित में नहीं होते। हमें एक सशक्त और पारदर्शी इमिग्रेशन सिस्टम की आवश्यकता है जो ना केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान को भी महत्व दे।”
ट्रंप गोल्ड वीजा योजना के खिलाफ उठ रहे ये सवाल अमेरिका की वर्तमान इमिग्रेशन नीति पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं। यदि इस योजना को लेकर सुधार या पुनः मूल्यांकन नहीं किया गया तो यह न केवल निवेशकों को निराश करेगा बल्कि अमेरिका के वैश्विक निवेश वातावरण को भी प्रभावित करेगा।
इस मसले पर अमेरिकी गृह मंत्री और अन्य संबंधित अधिकारियों से प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है, ताकि आगामी नीतिगत निर्णयों में इन सब आलोचनाओं को ध्यान में रखा जा सके। फिलहाल, इस विवाद के बीच ट्रंप गोल्ड वीजा की लोकप्रियता में कमी दिख रही है और विशेषज्ञ इसे गंभीरता से ले रहे हैं।








