Re. No. MP-47–0010301

यक्षगान ने अभिनव ग्रोवर को अभिनेता के रूप में कैसे आकार दिया

How Yakshagana shaped Abhinav Grover the actor

मुंबई: 7वीं शताब्दी के संस्कृत नाटक ‘भगवदज्जुकम्’ की अंग्रेजी रूपांतरण ‘योगी बनाम भोगी’ एक अनूठा नाट्य अनुभव प्रस्तुत करता है। यह प्रस्तुति पुणहा थिएटर द्वारा आयोजित की गई है और महेश दत्तानी द्वारा निर्देशित है, जो हास्य, दर्शनशास्त्र, लिंग और यक्षगान को एक साथ पिरोती है।

‘योगी बनाम भोगी’ का मंचन भारतीय पारंपरिक नाट्य कला यक्षगान और प्राचीन संस्कृत दूरदर्शी हास्य का मिश्रण है। यह नाटक सामाजिक और दार्शनिक मुद्दों को दर्शाता है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है कि जीवन और आध्यात्म क्या हैं।

महेश दत्तानी ने इस परियोजना को लेकर कहा, “हमने यक्षगान की परंपरा का इस्तेमाल करते हुए आधुनिक मुद्दों को एक दार्शनिक और हास्यपूर्ण दृष्टिकोण से उठाने की कोशिश की है। यह नाटक लिंग पहचान और सामाजिक रूढ़ियों पर सवाल उठाता है।”

पुणहा थिएटर के कलाकारों ने यक्षगान के पारंपरिक मुखौटे और वेशभूषा के साथ इस नाटक को जीवंत किया है, जिससे यह प्राचीन कला रूप और आधुनिक थिएटर के बीच एक खूबसूरत सेतु बन गया है। दर्शकों ने इस विकल्पात्मक प्रस्तुति को सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, खासकर युवा वर्ग में उत्सुकता और सराहना देखी गई है।

यह नाटक न केवल मनोरंजन करता है, बल्कि दर्शाता है कि कैसे प्राचीन संस्कृत साहित्य आज भी हमारे सामाजिक और दार्शनिक प्रश्नों के लिए प्रासंगिक हो सकता है। ‘योगी बनाम भोगी’ एक सांस्कृतिक और बौद्धिक समागम है, जो भारतीय दर्शकों के लिए नवचेतना और परंपरा का संगम प्रस्तुत करता है।

Source

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!