नई दिल्ली। करड़ी टेल्स, जो भारत की सबसे प्रमुख बच्चों की पुस्तक प्रकाशकों में से एक है, इस साल अपने स्थापना के 30 वर्षों का जश्न मना रहा है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर संस्थापक सदस्यों ने उन कहानियों, गीतों और पुस्तकों पर अपने विचार साझा किए, जिन्होंने अनगिनत बचपनों को यादगार बनाया है।
1990 के दशक की शुरुआत में स्थापित, करड़ी टेल्स ने भारतीय लोककथाओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दी। संस्थापकों का मानना है कि उनकी सफलता का मूल कारण था उन कहानियों को सशक्त और सजीव तरीके से प्रस्तुत करना, जो बच्चों के दिलों और दिमागों में लंबे समय तक बस गईं।
संस्थापक सदस्यों में से एक ने बताया, “हमारे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि हम बच्चों को सिर्फ मनोरंजन नहीं देते बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़ते हैं।” करड़ी टेल्स ने कई भाषाओं में पुस्तकें प्रकाशित की हैं, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों के बच्चे अपनी मातृभाषा में पढ़ने का आनंद ले सके।
इतने वर्षों में, करड़ी टेल्स ने केवल किताबें ही नहीं बनाई, बल्कि एडुकेशनल मटीरियल, ऑडियो-कैसेट, और डिजिटल कंटेंट जैसे कई नए प्रारूपों में भी विस्तार किया है। इससे उनकी पहुंच और भी व्यापक हुई है। संस्थापक ने यह भी बताया कि आने वाले वर्षों में करड़ी टेल्स नई तकनीकों और प्लेटफार्मों का उपयोग कर बच्चों तक अपनी कहानियों को और अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाना चाहता है।
30 सालों में करड़ी टेल्स ने भारतीय बच्चों की साहित्यिक दुनिया को समृद्ध किया है और वह स्थायी रूप से देश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहे हैं। इस उत्सव के मौके पर, प्रकाशक ने घोषणा की है कि वे नए लेखक और इलस्ट्रेटर के साथ मिलकर नई श्रृंखलाओं पर काम करेंगे जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्पद होंगी।
करड़ी टेल्स का यह 30वां वर्ष न केवल उनकी उपलब्धियों का जश्न है, बल्कि उनके द्वारा बुनी गई कहानियों के माध्यम से हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रतिबद्धता की भी पुष्टि करता है। यह कंपनी निरंतर यह साबित करने में लगी है कि कहानि केवल शब्दों का समूह नहीं होतीं, बल्कि वे बच्चों के सपनों की दुनिया की चाबी होती हैं।








