नई दिल्ली: भारतीय ग्रीन कार्ड आवेदकों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। जून 2026 के वीज़ा बुलेटिन में EB-1 और EB-2 श्रेणियों के लिए फाइनल एक्शन डेट्स में रेट्रोग्रेशन (पीछे हटना) देखा गया है, जो लाखों आवेदकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
EB-1 और EB-2 श्रेणियाँ उन उच्च-कुशल और पेशेवर विदेशी कर्मचारियों के लिए होती हैं जो अमेरिका में स्थायी निवास पाने के लिए आवेदन करते हैं। EB-1 श्रेणी में वैज्ञानिक, प्रोफेसर, शोधकर्ता और वरिष्ठ प्रबंधक आते हैं, जबकि EB-2 में उन लोगों का समावेश होता है जिनके पास उन्नत डिग्री या असाधारण योग्यता होती है।
राजदूतों और इमिग्रेशन विशेषज्ञों के मुताबिक, जून 2026 वीज़ा बुलेटिन में इन श्रेणियों के फाइनल एक्शन डेट्स का पीछे हटना मौजूदा संख्या सीमाओं, अप्लिकेशन की बढ़ती संख्या और अमेरिकी सरकार की आव्रजन नीतियों में बदलाव के कारण होगा। यह पीछे हटना भारतीय आवेदकों के वीज़ा प्रोसेसिंग टाइम को बढ़ाने और स्थायी निवास प्राप्त करने की प्रक्रिया को धीमा करने वाला साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की ओर से वीज़ा आवेदकों को इस स्थिति के मद्देनजर अपने आवेदन की रणनीतियों और वैकल्पिक योजना पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, आव्रजन नियमों में किसी भी नए बदलाव पर अपने अधिवक्ताओं और आधिकारिक स्रोतों से नियमित अपडेट लेते रहना आवश्यक है।
इस प्रकार, भारतीय EB-1 और EB-2 श्रेणी के आवेदकों को आगामी महीनों में धैर्य बरतने और परिस्थितियों के अनुसार अपने विकल्पों का पुनः मूल्यांकन करने की सलाह दी जाती है। यह समय आवेदन प्रक्रिया में सुधार के लिए महत्वपूर्ण निर्णयों और संभावित नीति संशोधनों के लिए भी निर्णायक साबित होगा।
अमेरिकी आव्रजन विभाग ने अभी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन वीज़ा बुलेटिन में हुए इस बदलाव के बाद इस मामले पर चर्चा और भी तेज हो चुकी है। आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या असत्य जानकारी से बचें और केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।
अंततः, यह रेट्रोग्रेशन भारतीय इमिग्रेशन समुदाय के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही जानकारी एवं रणनीति के साथ इस स्थिति को प्रबंधित किया जा सकता है।








