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सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य सीधी में आएगा नर घडियाल, मुरैना से लाए जाएंगे घडिय़ाल, गठित टीम कर रही आवश्यक तैयारियां…..

सीधी- जिले के सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य सीधी में नर घडिय़ाल के न होने से फिर वंशवृद्धि थम गई है। इसके लिए अभ्यारण्य की टीम मुरैना जाकर राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में प्रयास शुरू कर चुकी है। 4 नर घडिय़ाल लाने की अनुमति मिलने के बाद से ही प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। बताते चलें कि पूर्व में भी यही स्थिति सालों तक निर्मित रही बाद में सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य के अधिकारियों के काफी प्रयासों के बाद मुरैना घडिय़ाल अभ्यारण्य से नर घडिय़ाल यहां 17 दिसम्बर 2021 को लाया गया था। नर घडिय़ाल के आने के बाद दो मादा घडिय़ाल ने 72 बच्चों को जन्म दिया था। ऐसे में उम्मीद बढ़ी थी कि नर घडिय़ाल के आने के बाद अब सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य सीधी में घडिय़ालों की संख्या में तेजी से इजाफा होगा किन्तु सोन नदी में आए पानी के तेज बहाव के कारण यह नर घडिय़ाल बह गया। बाद में घडिय़ाल अभ्यारण्य द्वारा उसमें लगे चिप के माध्यम से उसका लोकेशन काफी समय बाद ट्रेस किया गया। उस दौरान नर घडिय़ाल का लोकेशन बिहार प्रांत में मिला। सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य के अधिकारियों द्वारा बिहार में सम्पर्क कर वहां बह कर पहुंचे नर घडिय़ाल को वापस लाने की पहल शुरू की किन्तु देने से साफ तौर पर इंकार कर दिया गया। बिहार के अधिकारियों का कहना था कि उक्त नर घडिय़ाल उनके यहां का है। इसके बाद से सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में घडिय़ालों की वंशवृद्धि के को लेकर फिर से अनिश्चितता निर्मित हो गई। बता दें कि वर्तमान समय में सोन घडियाल अभ्यारण्य में एक भी नर घडिय़ाल नहीं है। यहां 150 से ज्यादा घडिय़ालों के बच्चे थे। लेकिन, कुछ बच्चे पानी के तेज बहाव में बह गए तो कुछ अवैध रेत उत्खनन का शिकार हो गए। रेत के अवैध कारोबारी सोन नदी की मुख्य धारा को रोंककर नदी से रेत निकाल ली। इसलिए कुछ बच्चे भटकर जंगल में चले गए तो कई बच्चे पानी कम होने के कारण नष्ट हो गए। सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य क्षेत्र में नर घडिय़ालों की संख्या एक भी न होने के कारण अभ्यारण्य प्रबंधन ने चिंता जाहिर की थी। उधर जानकारों का कहना है कि सीधी जिले में सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य तीन दशक पूर्व बनाया गया था। उसके बाद यहां घडिय़ाल लाकर पालने की व्यवस्था बनाई गई थी। जिले में भंवर सेन सोन नदी एवं जोगदहा सोन नदी में ही घडिय़ालों के लिए उपयुक्त स्थान माना गया था। यहां बड़े-बड़े दह होने के कारण घडिय़ाल पानी के अंदर अपने रहने को उपयुक्त मानते हैं। फिर भी घडिय़ालों की संख्या सीधी जिले में आरंभ से ही नहीं बढ़ पा रही है। इसके लिए यह भी माना जा रहा है कि यहां का वातावरण घडिय़ालों के लिए उपयुक्त नहीं है। इस वजह से उनकी संख्या नहीं बढ़ पा रही है। लोगों का कहना है कि सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य सोन नदी में बन जाने के कारण यहां मौजूद रेत का अकूत भंडार का उपयोग आमजन मानस नहीं कर पा रहा है। जिन घडिय़ालों के लिए सोन नदी को आरक्षित कर दिया गया है उसका कोई लाभ नहीं दिख रहा है। ऐसे में सोन नदी में बनाए गए सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य को पूरी तरह से समाप्त कर देना चाहिए जिससे आम जन मानस नदी में मौजूद रेत का उपयोग कर सकें। सोन नदी में मौजूद रेत की गुणवत्ता काफी ऊंची हैए इस वजह से इसकी मांग दूर-दूर तक काफी है। लेकिन सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य के चलते यहां से रेत का उत्खनन पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

अभ्यारण्य में 87 घडिय़ालों की मौजूदगी
सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य सीधी में वर्तमान में 87 घडियालों की मौजूदगी बताई जा रही है। इनमें मादा घडिय़ाल 51, सब एडल्ट 24, वर्ष 2022 में जन्मे 12 बच्चे शामिल हैं। बताया गया है कि नर घडियाल विहीन सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में वरिष्ट कार्यालय से चार नर घडिय़ाल लाने की अनुमति मिली है। चारों नर घडिय़ाल राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य मुरैना से लाए जाएंगे। तीन नर घडिय़ाल लाने की अनुमति इसी वर्ष मिली है जबकि एक नर घडिय़ाल की अनुमति पिछले वर्ष ही मिल गई थी अधिकारियों का प्रयास है कि चारों न घडिय़ाल दिसंबर महीने में ठंड ज्यादा पडऩे पर लाए जाएं। उधर मुरैना गई टीम के दल प्रभारी एवं अधीक्षक सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य निकुंज पाण्डेय का कहना है कि चंबल अभ्यारण्य 422 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। एक दिन में 25 किलोमीटर का मुआयना करने पर सिर्फ तीन नर घडिय़ाल दिखे। कम ठंड के कारण घडिय़ाल कम दिखाई दे रहे हैं। ठंड बढ़ते ही वह बाहर आने लगेंगे। जिससे पकडऩे में आशानी होगी।

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