गौर से गुलजार हुआ सीधी का संजय टाइगर रिजर्व
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए 6 गौर पशु
सीधी जिले में संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र स्थित है, जहां टाइगर के साथ अन्य जीव भी बहुतायत मात्रा में पाए जाते हैं। लेकिन एक ऐसी प्रजाति थी जिसे गौर के नाम से जाना जाता था। वह अब यहां से विलुप्त हो चुकी थी।
गोजातीय पशु गौर की 30 वर्ष बाद 2023 मे वापसी हुई थी। प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार बीते 5 मई को एक बार फिर आधा दर्जन गौर लाकर यहां छोड़े गए हैं। जबकि बीते वर्ष जून को 35 गौर कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से लाकर छोड़े गए थे।
6 गौर पशु संजय टाइगर रिजर्व पहुंचे
अनुसार कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के 6 गौर अब संजय टाइगर रिजर्व मे अब पहुंच गए है। जैव विविधता को वापस लौटाने की कवायद के कारण इन्हें टाइगर रिजर्व क्षेत्र के पोड़ी रेंज में विचरण के लिए छोड़ा गया है। पार्क में गौर को लाने की लंबे समय से योजना बन रही थी। पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बने हैं।
गोजातीय जंगली पशुओं में सबसे बड़ा और भारी जानवर गौर गोजातीय पशु होता है। यह दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाने वाला एक बड़ा, काले लोम से ढंका गोजातीय पशु है। इसकी सबसे बड़ी आबादी भारत में पाई जाती है।
यह गोजातीय जंगली मवेशियों मे यह सबसे बड़ा होता है। साथ ही इसका वजन 600 से 700 किलो होता है। इन्हें एक जगह से दूसरे जगह ले जाने के लिए ट्रेंकुलाइज करना पड़ता है।
वन विभाग सीधी के डीएफओ क्षितिज कुमार ने बताया कि गौर के लिए पहले संजय टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने विशेषज्ञों से क्षेत्र का अध्ययन कराया गया था, जिसमें रिजर्व क्षेत्र का पोंड़ी रेंज को इनके लिए बेहद अनुकूल पाया गया था। इसलिए इसी क्षेत्र में गौर को लाकर छोड़ा जा रहा है। संजय टाइगर रिजर्व में 1995 तक बड़ी संख्या में गौर पाए जाते थे, लेकिन वर्ष 1997 के बाद यहां एक भी गौर नहीं दिखे।








