Sidhi24news: जब सैय्या भाए कोतवाल तो डर काहे का,पाला बदलकर आई त्रिमूर्ति गरीबों पर हावी
सीधी–एक मशहूर कहावत “जब सैय्या भाए कोतवाल तो डर काहे का” इन दिनों सीधी में चरितार्थ हो रही हैं। तीन दलबदलुओं की तिकड़ी गरीबों पर खुलेआम गुंडागर्दी करते हुए कहर ढ़ा रहीं हैं और राजनेताओं कि सरपरस्ती में नौकरशाह इनके आगे नतमस्तक है। जब जिसका वरचस्प हुआ ये उसी के साथ हो लिए। हालांकि इनके अतीत को खोजा जाए तो इनमें से कुछ रजिस्टर्ड अपराधी है और जेल भी गए हैं लेकिन दल बदलने के बाद अब पवित्र है और इस बारे में कोई बात नहीं करता। तीनों व्यापारी कम अत्याचारी ज्यादा है और बचाव के लिए राजनीतिक संरक्षण खोजते रहते हैं वर्तमान में सत्ता पक्ष की ओट में विकास की काल्पनिक कहानी सुनाकर न केवल सरकार को चूना लगा रहे हैं वरन लम्बे समय से बसे लोगों को बेघर करने पर तुले हैं और इस क्रम में न्यायालय के आदेश तक को दरकिनार कर रहे हैं।

जी हाँ बता दे कि शहर के मध्य स्थित सम्राट चौक के समीप शहर को विकसित रुप प्रदान करने का दावा करते हुए डीजे प्लाजा का निर्माण दीपक गुप्ता, भोला गुप्ता एवं पार्टनर कमल कामदार द्वारा ग्राम कोतरकला की भूमि खसरा क्रमांक 372, 686, 687 एवं 689 में कराया जा रहा है। उक्त निर्माण शुरू से ही विवादों में रहा है और इसके निर्माताओं के बारे में तो सब जानते ही है। ऐ तीनों कभी कांग्रेस के खेमे में हुआ करते थे लेकिन वर्तमान में सत्ता पक्ष की डाली पर बैठे है। इनके द्वारा सरकार भूमि पर लम्बे समय से आबाद लोगों को जबरन परेशान कर बेघर किया जा रहा है। पीड़िता रत्रू देवी ने बताया कि उक्त भूमियों में बने शासकीय कार्यालयों एवं आवासीय भवन को ध्वस्त कर दिया गया लेकिन खसरा क्रमांक 372 के अंश भाग 37.08 वर्गमीटर भूमि पर बने दो मंजिला माकान जिसका स्वामित्व रन्नू देवी पत्नी स्व. भगवानदीन के नाम है को यथावत रखा गया क्योंकि जिला न्यायालय सीधी के सिविल वाद क्रमांक 528ए/1996 के आदेश दिनांक 30.10.2000 में शासन द्वारा कलेक्टर एवं तहसीलदार को यह आदेशित किया गया था कि वादी रन्नू देवी पत्नी स्व० भगवानदीन कहार को उक्त भूमि और उसमें निर्मित माकान से उस समय तक न हटाया जाय जब तक उसे नगर पालिका क्षेत्र के अन्दर अन्य भूमि पर स्थापित न कर दिया जाय।
उक्त आदेश की अवहेलना करते हुये डीजे प्लाजा के मालिक एवं पार्टनर द्वारा पहले तो उसके माकान को चारो ओर से बाउन्ड्री बनाकर घेर दिया गया और आने-जाने का रास्ता बन्द कर दिया इसके बाद माकान के तीनो ओर की दीवाल की नीव तक की खुदाई कर दिया, नल औरबिजली का कनेक्शन तोड़ दिया जिससे परेशान होकर रत्रू देवी माकान खाली कर दे लेकिन बेवस बेसहारा विधवा महिला आखिर कहां जाती ऐसा सोच कर वह खतरे के बीच माकान में पूरे परिवार सहित 8-10 सदस्यों के साथ रह रही है। जगह-जगह शिकायत करने के बाद भी गरीब की कोई सुनने वाला नहीं है।
कार्रवाई करने दिया आवेदन

तहसीलदार द्वारा अवैधानिक रूप से कमरा और सीढ़ी गिरवा दिये जाने, माकान का ताला तोड़वाकर गृहस्थी का सामान बाहर फिकवाने, न्यायालय के स्टे होने के बाद भी की गई कार्यवाही से पीड़ित महिला ने थाना कोतवाली, पुलिस अधीक्षक एवं जिला कलेक्टर से गुहार लगाते हुये शिकायत की है कि माकान का ताला तोड़ने वाले निर्माणाधीन डीजे प्लाजा के मालिक एवं पार्टनर तथा उसके साथियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाय तथा घर से सामान बाहर फेंकने के दौरान तीन हजार नगद राशि एवं एक सोने की चैन तथा एक अंगूठी चोरी करने का भी आरोप लगाया गया है। लेकिन सत्ता पक्ष का दबाव होने के कारण इन पर जांच कार्रवाई करने से परहेज किया जा रहा है।

बिना किसी सूचना के हुई कार्रवाई
वेबा रन्नू देवी द्वारा बताया गया कि न्यायालय के उक्त आदेश के बाद भी तहसीलदार गोपद बनास ने नगर निरीक्षक के साथ राजस्व व पुलिस कर्मियों जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी थी को लेकर बिना किसी पूर्व सूचना दिये खड़े होकर माकान का ताला तुड़वाकर घर का पूरा सामान बाहर फेकवा दिया, छोटे-छोटे बच्चों को कड़ी धूप में बाहर करवा दिया जो विधिक रूप से उचित नहीं था और मानवीय आधार पर भी ऐसी कार्यवाही नहीं करना चाहिए। लेकिन इन सब को दरकिनार करते हुए जेसीबी मशीन लगाकर सीढ़ी एवं एक कमरा घर गिरवा दिया गया है। जबकि सबको बताया जा रहा था कि उक्त का घर का स्थगन मिला हुआ है।
3 जून को मिला था स्थगन
पीड़िता द्वारा बताया गया कि स्थानीय जिला न्यायालय के तृतीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड के न्यायालय में व्यवहारवाद दायर किया जिसका व्यवहारवाद क्रमांक/175ए/2024 है, जिसमें पारित स्थगन आदेश दिनांक 03.06.2024 के अनुसार प्रतिवादीगण दीपक गुप्ता भोला गुप्ता को यह आदेश दिया गया था कि खसरा क्रमांक 372 के अंश भाग रकवा 17 गुणा 34 वर्गफीट अर्थात 37.08 वर्ग मीटर पर बने वादग्रस्त माकान में वादी के शातिपूर्ण आधिपत्य में स्वयं अथवा अन्य किसी के माध्यम से कब्जा तथा हस्तक्षेप करने से निषेधित किया था।
त्रिमूर्ति के किस्से शहर भर में है मशहूर
विकास का छलावा दिखाकर व्यक्तिगत हितों को सिद्ध करने के लिए शहर में कराए जा रहे डीजे प्लाजा के निर्माण के निर्माताओं की कहानी शहर भर में चर्चा का विषय है फिर चाहे छात्रवृत्ति के हेर फेर में जेल जाने की बात हो या शहर के बीचो-बीच स्थित जमीन पर स्वीकृति से ज्यादा निर्माण की बात हो भूमि की दलाली से लेकर अनाज की जमाखोरी कालाबाजारी और कोयले के कारोबार सब में इन त्रिमूर्ति के सदस्य संलिप्त है। लेकिन धन बल बाहुबल और राजनीतिक बल के कारण कोई इनसे सवाल नहीं कर रहा और यह अपनी मनमानी पर तुले हुए हैं कई बार शासन में इन पर शिकंजा भी कसा लेकिन न जाने क्यों धीरे-धीरे वह शिकंजा ढ़ीला पड़ता गया। कोऑपरेटिव बैंक के बगल में निर्मित बिल्डिंग की जमीन के नियम विरुद्ध खरीद फरोख्त एवं सीमा से अधिक निर्माण की जांच भी लंबे समय से होते-होते रह गई और वहां पर आलीशान दुकाने चल रही है। छात्रवृत्ति घोटाला तो जैसे पुरानी बात बन कर रह गई। कृषि मंडी परिसर में ही भारी भरकम गल्ला व्यापारी की दुकान और शहर के दूसरे छोर पर गोदाम के साथ-साथ कोयले की दुकान हर जगह मनमानी और कमियां है और इन सब में इन्हीं त्रिमूर्ति की भूमिका है बावजूद इसके गरीबों की हितैषी बनने वाली सरकार और उसके नुमाइंदे और नौकरशाह मूक दर्शक बने हुए हैं।








