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बांधवगढ़ में हाथियों की मौत का हुआ खुलासा जानिए किस कारण से गई 10 हाथियों की जान

 बांधवगढ़ में हाथियों की मौत का हुआ खुलासा जानिए किस कारण से गई 10 हाथियों की जान

उमरिया – बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगलों में हाल ही में हुई हाथियों की मौत के कारणों का खुलासा हुआ है। अधिकारियों द्वारा किए गए शुरुआती जांच में यह पता चला कि फसलों में मिलाए गए *माइकोटाक्सिन* के कारण 10 जंगली हाथियों की मौत हुई थी। माइकोटाक्सिन, एक प्रकार का विषैला यौगिक होता है जो फंगस के संक्रमण से उत्पन्न होता है और मानव एवं पशुओं के लिए घातक होता है। इस घटना ने वन्यजीवों और पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से एक नया संकट उत्पन्न कर दिया है।

घटना का विवरण

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में ये हाथी फसल में मिलाए गए दूषित चारे को खाकर बीमार हुए थे। बाद में, इन हाथियों में से 10 की मृत्यु हो गई। घटना के बाद, एक और छोटा जंगली हाथी बीमार हुआ और उसके शरीर में कंपन जैसी समस्याएं देखी गईं, जो माइकोटाक्सिन के प्रभाव को प्रमाणित करती हैं।

स्थानीय प्रशासन और वन्यजीव अधिकारियों ने घटना के बाद सुरक्षा उपायों को कड़ा कर दिया है। वन्यजीव प्रबंधन ने मवेशियों और अन्य जानवरों की निगरानी शुरू कर दी है और चारे के सैंपल एकत्र किए गए हैं।

 क्या है माइकोटाक्सिन?

माइकोटाक्सिन, एक प्रकार के फंगल टॉक्सिन होते हैं, जो फसलों पर फंगस के संक्रमण के दौरान उत्पन्न होते हैं। ये यौगिक चारे और खाद्य पदार्थों में मिलकर उन पर विषाक्त प्रभाव डाल सकते हैं। माइकोटाक्सिन के संपर्क में आने पर पशुओं और मनुष्यों में उल्टी, दस्त, श्वसन संबंधी समस्याएं, भूख में कमी और शरीर में कंपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

 अन्य पशुओं में भी प्रभाव

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लखनौटी और रोहनिया गांवों में भी माइकोटाक्सिन के कारण 22 भैंसों के बीमार होने की खबरें आई हैं। ये भैंसें भी *कोदो* फसल खाने से प्रभावित हुई हैं। पशु चिकित्सक मौके पर पहुंचकर इलाज कर रहे हैं, लेकिन यह स्थिति भी गंभीर है, जिससे इस प्रकार के विषाक्त पदार्थों के प्रभाव के खतरे को और बढ़ा देती है।

 पिछले उदाहरण

यह पहली बार नहीं है जब माइकोटाक्सिन के कारण जानवरों की मौत हुई हो। इस साल मार्च में, शहडोल जिले के गोहपारू तहसील में भी कोदो खाने के कारण एक ही परिवार के पांच लोग बीमार हुए थे। 1999-2000 में, अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ क्षेत्र में भी कोदो की गहाई के दौरान कई बैल माइकोटाक्सिन से प्रभावित हुए थे, जिसके परिणामस्वरूप उनकी मृत्यु हो गई थी।

 जांच और कार्रवाई

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने घटना के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अलर्ट मोड पर आकर मवेशियों की निगरानी शुरू कर दी है। एसआइटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) और एसटीएसएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पीसीसीएफ (प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट) वाइल्डलाइफ और सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू (सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ) भी मामले की निगरानी कर रहे हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के फंगल संक्रमण और माइकोटाक्सिन के प्रभावों से न केवल वन्यजीवों, बल्कि घरेलू पशुओं और मनुष्यों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए, फसलों में इनकी निगरानी और उपचार अत्यंत आवश्यक है।

बांधवगढ़ में हुई हाथियों की मौत से यह स्पष्ट हो गया है कि माइकोटाक्सिन के प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह एक गंभीर पर्यावरणीय संकट है, जो न केवल वन्यजीवों, बल्कि मानव जीवन के लिए भी खतरे का कारण बन सकता है। इस मामले की जांच और इसके समाधान के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को त्वरित कार्रवाई करनी होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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