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मध्यप्रदेश में लागू होगा नया किराएदारी मॉडल एक्ट, मकान मालिक और किराएदार के अधिकारों में बड़ा बदलाव

मध्यप्रदेश में लागू होगा नया किराएदारी मॉडल एक्ट, मकान मालिक और किराएदार के अधिकारों में बड़ा बदलाव

भोपाल, 18 नवंबर 2024: मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में किराएदारी से संबंधित विवादों को सुलझाने के लिए एक नया कानून तैयार किया है। यह कानून पुराने किराएदारी अधिनियम 2010 को बदलने जा रहा है और मकान मालिकों और किराएदारों के बीच संबंधों को फिर से परिभाषित करेगा। इस नए किराएदारी मॉडल एक्ट को आगामी 16 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है, यदि इसे कैबिनेट से मंजूरी मिल जाती है।

नए एक्ट का उद्देश्य न केवल किराएदारी संबंधी विवादों को सुलझाना है, बल्कि किराएदारों और मकान मालिकों के बीच पारदर्शिता बढ़ाना और कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाना है। इसमें कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जो पुराने कानून से अलग और अधिक सशक्त हैं।

किराएदारों के लिए नए अधिकार और जिम्मेदारियां

नए एक्ट के तहत, अगर कोई किराएदार एग्रीमेंट खत्म होने के बाद मकान खाली नहीं करता, तो उसे पहले दो महीने तक दोगुना किराया और तीसरे महीने से चार गुना किराया देना होगा। इससे मकान मालिक को बिना कोर्ट में गए किराएदार से मकान खाली करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, किराएदार को रहने के लिए दो महीने का एडवांस और व्यापारिक मकान के लिए छह महीने का एडवांस देना होगा। किराएदार को यह सुनिश्चित करना होगा कि मकान पर अवैध कब्जा न हो और वह किसी अन्य व्यक्ति को उप-समझौता या सब-लेट न करे। साथ ही, किराएदार सामान्य मरम्मत के लिए जिम्मेदार होगा, और यदि वह मरम्मत करने से इनकार करता है, तो मकान मालिक उसकी सिक्योरिटी डिपॉजिट से मरम्मत का खर्च काट सकता है।

मकान मालिक के लिए नए नियम

नए एक्ट में मकान मालिक को भी कुछ अधिकार मिलेंगे, लेकिन उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि किराएदार को किसी भी तरह की जरूरी सुविधाएं जैसे पानी, बिजली, स्वच्छता सेवाएं आदि बंद न की जाएं। अगर किराएदार मकान खाली करने से इनकार करता है, तो मकान मालिक को किराया प्राधिकृत अधिकारी के पास अपील करनी होगी। इसके अलावा, यदि मकान खाली होता है तो मकान मालिक को किराएदार को उसकी सुरक्षा निधि उसी दिन वापस करनी होगी।

नए एक्ट की प्रमुख विशेषताएं

1. किराएदार और मकान मालिक के बीच एग्रीमेंट: अब किराएदार और मकान मालिक के बीच का एग्रीमेंट कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा। एग्रीमेंट के लिए स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, और इसकी दो प्रतियां रहेंगी—एक किराएदार के पास और दूसरी मकान मालिक के पास।

2. किराया विवादों का समाधान: पुराने एक्ट के तहत, किराएदार और मकान मालिक के विवाद सिविल कोर्ट में जाते थे, लेकिन नए एक्ट में किराएदार और मकान मालिक दोनों के विवादों को रेंट ट्रिब्यूनल और रेंट कोर्ट में सुलझाया जाएगा। जिलों में डिप्टी कलेक्टर किराया प्राधिकृत अधिकारी होंगे, और रेंट कोर्ट में अतिरिक्त कलेक्टर नियुक्त होंगे।

3. किराया बढ़ोतरी का प्रावधान: किराए की बढ़ोतरी का प्रस्ताव केवल **मकान मालिक और किराएदार दोनों की सहमति** से ही संभव होगा। इससे किराएदारों को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी और मनमानी बढ़ोतरी पर रोक लगेगी।

4. प्रॉपर्टी एजेंट: पुराने एक्ट में प्रॉपर्टी एजेंट का कोई उल्लेख नहीं था, लेकिन नए एक्ट में प्रॉपर्टी एजेंट को कानूनी इकाई के रूप में रजिस्टर्ड करना अनिवार्य होगा। प्रॉपर्टी एजेंटों के लिए एक नई नियामक व्यवस्था लागू की जाएगी, जो उन्हें कानूनी मान्यता देगी।

नए एक्ट की तुलना में पुराने एक्ट में क्या था?

1. दायरा: 2010 का किराएदारी एक्ट केवल शहरी क्षेत्रों और टाउनशिप तक सीमित था, जबकि नया एक्ट पूरे राज्य में लागू होगा।
2. किराएदार और मकान मालिक की मृत्यु के बाद: पुराने एक्ट में किराएदार की मृत्यु के बाद ही उनके उत्तराधिकारी के अधिकार तय होते थे, जबकि नए एक्ट में यह प्रावधान किराएदार और मकान मालिक दोनों के लिए लागू होगा।
3. कंपनियों और संस्थाओं के लिए छूट: पुराने एक्ट में दूतावास, आयोग, मल्टीनेशनल कंपनियों, और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को छूट दी गई थी, लेकिन नए एक्ट में इनके लिए कोई छूट नहीं होगी।
4. प्रॉपर्टी एजेंट: पुराने एक्ट में प्रॉपर्टी एजेंट के लिए कोई प्रावधान नहीं था, लेकिन नए एक्ट में एजेंट को कानूनी इकाई मानते हुए उसका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है।

प्रदेश के लिए क्यों जरूरी है नया एक्ट?

मध्यप्रदेश में किराएदारों और मकान मालिकों के बीच बढ़ते विवादों को देखते हुए नए एक्ट की आवश्यकता महसूस की गई। राज्य की बढ़ती जनसंख्या, खाली पड़े मकानों और शहरों में रहने की बढ़ती प्रवृत्ति ने यह सुनिश्चित किया कि एक अधिक प्रभावी और समग्र कानून की आवश्यकता है। रियल एस्टेट मार्केट में भी पारदर्शिता और स्थिरता लाने के लिए इस नए कानून को जरूरी माना जा रहा है।

नए किराएदारी मॉडल एक्ट का उद्देश्य राज्य में किराएदार और मकान मालिक के संबंधों को अधिक मजबूत और स्पष्ट बनाना है। इससे न केवल किराएदारों और मकान मालिकों के अधिकार सुरक्षित होंगे, बल्कि भविष्य में होने वाली विवादों का समाधान भी तेजी से किया जा सकेगा। यह एक्ट दोनों पक्षों के लिए एक नई उम्मीद और सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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