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सैल्यूट के बाद सस्पेंशन: जानिए क्या है पूरा मामला? 

सैल्यूट के बाद सस्पेंशन: जानिए क्या है पूरा मामला? 

मुरैना: जिले के रिठौरा थाना प्रभारी जितेंद्र दौहरे को ग्वालियर मॉल में शॉपिंग के दौरान जिले के एसपी से मुलाकात करना भारी पड़ गया। बिना अनुमति थाना छोड़ने को अनुशासनहीनता मानते हुए एसपी ने टीआई को सस्पेंड कर दिया। यह घटना मुरैना में चर्चा का विषय बन गई है।

क्या है पूरा मामला?

मंगलवार रात करीब 8 बजे रिठौरा थाना प्रभारी जितेंद्र दौहरे अपने परिवार के साथ ग्वालियर के एक मॉल में शॉपिंग कर रहे थे। संयोगवश, उसी समय मुरैना के एसपी भी वहां पहुंचे। टीआई ने एसपी को देखकर उन्हें सैल्यूट किया। हालांकि, एसपी ने उस वक्त कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन मुरैना वापस आते ही टीआई के सस्पेंशन का आदेश जारी कर दिया।

अनुशासनहीनता का हवाला

एसपी ने अपने आदेश में कहा कि टीआई ने थाना छोड़ने से पहले न ही किसी वरिष्ठ अधिकारी से अनुमति ली और न ही एसपी को सूचना दी। इसे अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया।

निलंबन के दौरान नियम

  • निलंबन के दौरान टीआई को पुलिस लाइन में रहना होगा।
  • सुबह-शाम की गणना में अनिवार्य रूप से शामिल होना होगा।
  • बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर प्रतिबंध रहेगा।
  • निलंबन अवधि के दौरान उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

एसपी की सख्ती बनी चर्चा का विषय

एसपी ने जिले में तैनाती के बाद से ही अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त रुख अपनाया है।

  • थाना प्रभारियों को बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर रोक है।
  • रात्रि गश्त के दौरान टीआई को मौके पर मौजूद रहना होगा और इसकी लाइव लोकेशन व फोटो भेजनी होगी।
  • थाने में सुबह-शाम होने वाली गणना में सभी कर्मियों को समय पर शामिल होना होगा।
  • मुख्यालय या सीट से अनुपस्थित पाए जाने पर गैरहाजिरी लगाई जाएगी, जिसके बाद एसपी के समक्ष पेश होकर ही पुनः ज्वाइनिंग की अनुमति दी जाएगी।

कर्मचारियों पर असर

एसपी की इस सख्ती से पुलिस कर्मियों और अधिकारियों में नाराजगी बढ़ रही है। अब तक कई कर्मियों को अनुशासनहीनता के मामलों में सजा दी जा चुकी है। अचानक थानों और कार्यालयों की चेकिंग भी आम हो गई है, जिससे पुलिस कर्मियों पर दबाव महसूस हो रहा है।

स्थिति पर चर्चा जारी

यह घटना न केवल मुरैना पुलिस विभाग में बल्कि जिले के बाहर भी चर्चा का विषय बन गई है। पुलिस कर्मियों के बीच इसे लेकर मतभेद हैं—कुछ इसे अनुशासन के लिए जरूरी मानते हैं, तो कुछ इसे अत्यधिक सख्ती का उदाहरण बताते हैं।

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