भोपाल: माशिमं के 120 प्राचार्य और अधिकारियों का सिंगापुर दौरा, 4 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत
मध्य प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा आयोजित 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में 95 प्रतिशत से अधिक परिणाम देने वाले स्कूलों के प्राचार्य और अधिकारियों का 120 सदस्यीय दल जनवरी 2025 में सिंगापुर के अध्ययन दौरे पर जाएगा। इस दौरे का उद्देश्य सिंगापुर की उन्नत शिक्षा प्रणाली और उससे संबंधित प्रबंधन के तरीकों का अध्ययन करना है, ताकि इन सुधारों को मध्य प्रदेश के स्कूलों में लागू किया जा सके।
दौरे का उद्देश्य और योजना
इस विशेष यात्रा के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 4 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। हर सदस्य पर लगभग ₹2.5 लाख खर्च होने का अनुमान है। यह यात्रा दो दलों में होगी:
- पहला दल 6 जनवरी 2025 को सिंगापुर के लिए रवाना होगा, जिसमें 70 प्राचार्य और अधिकारी शामिल होंगे।
- दूसरा दल 13 जनवरी को यात्रा करेगा, जिसमें 50 सदस्य होंगे।
दौरे के दौरान ये अधिकारी और प्राचार्य सिंगापुर की शिक्षा प्रणाली, शिक्षक प्रशिक्षण, विद्यार्थियों की शैक्षिक प्रगति, और शिक्षा से संबंधित अन्य पहलुओं का अध्ययन करेंगे। वे वहां के शैक्षिक प्रबंधन के तरीकों को समझने की कोशिश करेंगे और अपने स्कूलों में सुधार के लिए उन तरीकों को अपनाने की योजना बनाएंगे।
पहले हुए अध्ययन दौरे
यह पहला मौका नहीं है जब मध्य प्रदेश के शिक्षा अधिकारी और प्राचार्य विदेशों में शिक्षा पद्धतियों का अध्ययन करने के लिए गए हों। इससे पहले भी राज्य के अधिकारियों और प्राचार्यों का विभिन्न देशों में शिक्षा संबंधी अध्ययन दौरे हुए हैं।
- दक्षिण कोरिया (2019):
- 250 अधिकारियों और प्राचार्यों के एक दल ने दक्षिण कोरिया का दौरा किया था।
- इस दौरे का मुख्य उद्देश्य स्टीम (STEAM) शिक्षा पद्धति को समझना था, जिसमें साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, आर्ट्स और मैथ्स की शिक्षा दी जाती है।
- सिंगापुर जैसे देशों से शिक्षा के बेहतर मॉडल को मध्य प्रदेश के स्कूलों में लागू करने की सिफारिश की गई थी, जिससे विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास में मदद मिल सके।
- दिल्ली (2021):
- राज्य के प्राचार्यों और अधिकारियों के एक दल को दिल्ली के सरकारी स्कूलों का अध्ययन करने भेजा गया था।
- दिल्ली में सरकारी स्कूलों के सुधारों और नई शिक्षा नीति के तहत किए गए प्रयासों को समझने के लिए यह यात्रा की गई थी।
हालांकि, दक्षिण कोरिया के दौरे से आई स्टीम शिक्षा पद्धति की सिफारिशों का मध्य प्रदेश में प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन नहीं हो सका, लेकिन सरकार ने इस बार सिंगापुर दौरे के बाद अधिक ठोस और प्रभावी सुधार की योजना बनाई है।
क्या है सिंगापुर की शिक्षा प्रणाली?
सिंगापुर की शिक्षा प्रणाली को दुनिया भर में उत्तम और व्यावसायिक दक्षता के लिए जाना जाता है। यहाँ की शिक्षा पद्धति में अनुशासन, साक्षात्कार आधारित शिक्षा और नौकरी-उन्मुख कौशल विकास को विशेष महत्व दिया जाता है।
- आधुनिक तकनीकों का समावेश: सिंगापुर में शैक्षिक सामग्री और तकनीकों का उपयोग विद्यार्थियों को अधिक आकर्षक और व्यवहारिक तरीके से पढ़ाने के लिए किया जाता है।
- व्यावसायिक शिक्षा: विद्यार्थियों को स्वयं से संबंधित उद्योगों में प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे शिक्षा के बाद रोजगार पाने के लिए तैयार हो सकें।
- मल्टी डिस्पिलनरी पद्धति: यहां छात्रों को केवल एक विषय में विशेषज्ञ नहीं बनाया जाता, बल्कि उन्हें सामाजिक विज्ञान, मानविकी और प्राकृतिक विज्ञान सहित विभिन्न विषयों का ज्ञान दिया जाता है।
दौरे से मिलने वाली सिफारिशें
मध्य प्रदेश के अधिकारी इस दौरे के बाद सिंगापुर की शिक्षा प्रणाली के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसमें उनके द्वारा किए गए अध्ययन के आधार पर सुधार के सुझाव होंगे। ये सिफारिशें राज्य सरकार को भेजी जाएंगी और यदि सरकार इन्हें मंजूर करती है, तो उन्हें राज्य के सरकारी स्कूलों में लागू किया जाएगा।
उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे के बाद:
- शैक्षिक सुधारों की प्रभावी योजना तैयार की जाएगी।
- तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को अधिक बल मिलेगा।
- स्कूलों के ढांचागत सुधार पर ध्यान दिया जाएगा।
सरकार का नजरिया
मध्य प्रदेश सरकार इस पहल को बहुत गंभीरता से ले रही है। सरकार के अनुसार, सिंगापुर का शैक्षिक मॉडल बेहद सफल और किफायती है। इससे शिक्षकों की ट्रेनिंग, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए एक स्थिर आधार मिलेगा। इस यात्रा से जुड़ी सिफारिशें राज्य की शिक्षा प्रणाली में सुधार और विकास की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती हैं।
मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग की यह पहल भविष्य में राज्य के सरकारी स्कूलों में सकारात्मक बदलाव लाने की उम्मीद जता रही है। सिंगापुर जैसे देशों की शैक्षिक पद्धतियों को समझकर इनका क्रियान्वयन राज्य के स्कूलों में किया जाएगा, जिससे गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिलेगा। यह सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो न सिर्फ शिक्षा के स्तर को ऊंचा करेगा, बल्कि विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।








