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मध्य प्रदेश: माधव राष्ट्रीय उद्यान और रातापानी को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने की तैयारी

मध्य प्रदेश: माधव राष्ट्रीय उद्यान और रातापानी को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने की तैयारी

भोपाल: मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत माधव राष्ट्रीय उद्यान और रातापानी वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने माधव राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व बनाने की सैद्धांतिक सहमति दे दी है, और अगले छह महीनों में इसे औपचारिक रूप से घोषित किए जाने की उम्मीद है।

माधव राष्ट्रीय उद्यान: 9वां टाइगर रिजर्व बनने की तैयारी

  • क्षेत्रफल: 1,751 वर्ग किमी
    • कोर क्षेत्र: 375 वर्ग किमी
    • बफर क्षेत्र: 1,276 वर्ग किमी
  • विशेषताएं:
    • इस क्षेत्र में 1 नर और 1 मादा बाघ छोड़े जाएंगे।
    • कूनो राष्ट्रीय उद्यान की सीमाओं से सटे इस क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई जाएगी, जिससे चीतों और अन्य वन्यजीवों की रक्षा सुनिश्चित होगी।
    • पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार और NTCA का आभार व्यक्त किया।

रातापानी वन्यजीव अभयारण्य: 8वां टाइगर रिजर्व बनने की प्रक्रिया अंतिम चरण में

  • क्षेत्रफल: 1,244.518 वर्ग किमी
    • कोर क्षेत्र: 763.812 वर्ग किमी
    • बफर क्षेत्र: 480.706 वर्ग किमी
  • विशेषताएं:
    • यह क्षेत्र प्रदेश का सबसे अधिक बाघों वाला वन्यजीव अभयारण्य है।
    • यहां कोई राजस्व ग्राम या खेती की भूमि नहीं आती है, जिससे विस्थापन की आवश्यकता नहीं होगी।
    • आदिवासी समुदाय की चिंताओं को दूर करने के लिए वन विभाग ने 100 से अधिक बैठकों का आयोजन किया।

वन विभाग के प्रयास:

  • वन मंडलाधिकारी हेमंत रैकवार के अनुसार, कोर और बफर क्षेत्रों का निर्धारण कर फाइनल ड्राफ्ट विधि विभाग को स्वीकृति के लिए भेज दिया गया है।
  • अभयारण्य के आसपास सुरक्षा के लिए नियम सख्त किए जाएंगे।

मध्य प्रदेश: टाइगर रिजर्व की राजधानी

  • वर्तमान में प्रदेश में 7 टाइगर रिजर्व हैं: सतपुड़ा, पेंच, बांधवगढ़, कान्हा, संजय डुबरी, पन्ना और रानी दुर्गावती।
  • माधव और रातापानी के जुड़ने के बाद यह संख्या 9 हो जाएगी।

पर्यटन और संरक्षण को बढ़ावा

माधव और रातापानी को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने से:

  • बाघों के संरक्षण को नया आयाम मिलेगा।
  • पर्यटन में वृद्धि होगी, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति को बल मिलेगा।
  • स्थानीय निवासियों को रोजगार और विकास के अवसर प्राप्त होंगे।

निष्कर्ष:
मध्य प्रदेश, जो पहले से ही “बाघों की भूमि” के रूप में प्रसिद्ध है, इन दो नए टाइगर रिजर्व के जुड़ने से वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन में और अधिक मजबूत स्थान बनाएगा।

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