सीधी:नायब तहसीलदार की मौत: चार वर्षों तक संघर्ष के बाद जिंदगी की जंग हारी
सीधी जिले के कुसमी तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार लवकेश मिश्रा ने चार वर्षों तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद अंततः 1 जनवरी 2025 को रीवा मेडिकल कॉलेज में अंतिम सांस ली। 2019 में हुए इस हमले ने न केवल एक सरकारी अधिकारी को गहरी चोट पहुंचाई, बल्कि प्रशासनिक सुरक्षा को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए।
हमले की पृष्ठभूमि
1 सितंबर 2019 की रात, तहसीलदार लवकेश मिश्रा अपने शासकीय आवास के बाहर टहल रहे थे। उसी दौरान, कुसमी के स्थानीय निवासी देवीदीन जायसवाल ने उन पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला कर दिया। यह हमला इतनी क्रूरता से किया गया था कि तहसीलदार गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले का कारण आरोपी की अवैध गतिविधियों को लेकर तहसीलदार द्वारा की गई सख्ती बताई गई।
हमले का कारण और आरोपी का रवैया
प्रभारी तहसीलदार के आवास के सामने आरोपी देवीदीन जायसवाल चाय की गुमठी चलाता था। वहां देर रात शराबियों का जमावड़ा लगता था, जिससे क्षेत्र में अराजकता फैलती थी। तहसीलदार ने उसे चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा जारी रहा तो उसकी गुमठी हटवा दी जाएगी। इस चेतावनी से खफा होकर आरोपी ने तहसीलदार पर कुल्हाड़ी से हमला किया।
हमले के बाद आरोपी और उसके नाबालिग साथी ने कुल्हाड़ी और खून से सने कपड़ों को तालाब में धोकर सबूत मिटाने की कोशिश की। हालांकि, एक चप्पल कीचड़ में फंसने से उनके खिलाफ सबूत मिल गए।
चार वर्षों का संघर्ष
हमले के बाद लवकेश मिश्रा को तत्काल जिला अस्पताल सीधी से रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहां उनकी सर्जरी की गई, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें इंदौर, मुंबई और दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो बार उनकी खोपड़ी बदली गई, लेकिन स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ।
डॉक्टरों द्वारा इलाज में असमर्थता जताने के बाद उन्हें उनके घर देवसर लाया गया। 31 दिसंबर 2024 की रात अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रीवा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां 1 जनवरी 2025 की सुबह उनका निधन हो गया।
परिवार और समाज में शोक
लवकेश मिश्रा के निधन से उनका परिवार, प्रशासनिक अधिकारी और समाज गहरे शोक में है। चार साल तक उनके परिवार ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। यह घटना सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा और उनकी चुनौतियों को उजागर करती है।
न्याय और प्रशासनिक सुधार की मांग
यह घटना प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए बेहतर उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। आरोपी देवीदीन जायसवाल और उसके साथी पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि यह घटना एक मिसाल बने और भविष्य में कोई ऐसी हिम्मत न करे।
सरकार को ऐसे अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनके परिवारों को उचित मुआवजा और सहारा प्रदान करना चाहिए। लवकेश मिश्रा की शहादत प्रशासनिक सेवाओं के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है। यह घटना केवल एक अधिकारी की मृत्यु नहीं है, बल्कि व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता की चेतावनी भी है।








