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महेश्वर में मोहन कैबिनेट की विशेष बैठक आज,  शराबबंदी का बड़ा फैसला संभावित..? 

महेश्वर में मोहन कैबिनेट की विशेष बैठक आज,  शराबबंदी का बड़ा फैसला संभावित..? 

महेश्वर/खरगोन: देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में शुक्रवार को महेश्वर में मध्यप्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक आयोजित हो रही है। इस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में कई बड़े फैसले लिए जाने की संभावना है, जिनमें प्रमुख है प्रदेश के 17 धार्मिक शहरों में शराबबंदी का निर्णय।

मुख्य बिंदु:

  1. शराबबंदी का ऐलान:
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को नरसिंहपुर में 17 धार्मिक शहरों में शराबबंदी का ऐलान किया। आज की कैबिनेट बैठक में इस पर औपचारिक मुहर लगने की संभावना है।

    • शराबबंदी के कारण होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए भी चर्चा की जाएगी।
    • नई आबकारी नीति पर चर्चा और मंजूरी दी जाएगी।
  2. महिलाओं के लिए नई पॉलिसी:
    बैठक में महिला सशक्तिकरण मिशन के अंतर्गत एक नई नीति पेश की जाएगी। यह नीति देवी अहिल्याबाई के सुशासन और धार्मिक नीतियों से प्रेरित होगी।
  3. भोपाल में नया ब्रिज:
    कैबिनेट बैठक में भोपाल के बावड़िया कलां क्षेत्र में 180 करोड़ रुपये की लागत से एक नए ब्रिज के निर्माण को मंजूरी दिए जाने की संभावना है।
  4. देवी अहिल्याबाई से जुड़ी योजनाएं:
    बैठक में देवी अहिल्याबाई के जीवन और उनके सुशासन से जुड़ी योजनाओं को मंजूरी दी जाएगी।

शराबबंदी: सामाजिक सुधार का प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा, “शराब से परिवार बर्बाद हो जाते हैं। यह एक सामाजिक बुराई है। महारानी अहिल्याबाई के सुशासन और धार्मिक दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए, 17 धार्मिक नगरों में शराबबंदी की जाएगी। अगले वित्त वर्ष से यहां सभी देसी-विदेशी शराब दुकानों को बंद कर दिया जाएगा।”

इतिहास में धार्मिक नगरों पर प्रतिबंध

पूर्व में मुख्यमंत्री उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रदेश के 17 धार्मिक नगरों को पवित्र धार्मिक शहर घोषित किया था। लेकिन इन प्रतिबंधों को लागू करने में सफलता नहीं मिल सकी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अब इस दिशा में ठोस निर्णय लेने की बात कही है।

कैबिनेट के फैसलों का व्यापक असर

महेश्वर में आयोजित यह विशेष बैठक राज्य के सामाजिक और धार्मिक विकास के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गहरा प्रभाव डालेगी। देवी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती पर लिए जा रहे ये निर्णय राज्य के सांस्कृतिक और सामाजिक उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

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