प्राचार्य की तानाशाही और आयुक्त के आदेश की अनदेखी: शिक्षक को उच्च पद पर कार्यभार नहीं सौंपा

सीधी (म.प्र.)– शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालक पतुलखी के प्रभारी प्राचार्य ओमप्रकाश पाठक की तानाशाही और लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त के आदेश की अनदेखी करने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, प्राचार्य अपनी तानाशाही में व्यस्त होकर बच्चों की शिक्षा व्यवस्था की ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं और लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं।
आयुक्त के आदेश का उल्लंघन
लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश, भोपाल ने 6 अगस्त 2024 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें चितरंजन प्रसाद मिश्र को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालक पतुलखी में उच्च पद का प्रभार सौंपने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश के तहत संबंधित शिक्षक को कार्यभार ग्रहण करने के लिए 7 कार्यदिवसों के भीतर विद्यालय में नियुक्त किया जाना था, लेकिन प्राचार्य ओमप्रकाश पाठक ने आज तक इस आदेश का पालन नहीं किया है। प्राचार्य द्वारा उच्च पद प्रभार के आदेश की अवहेलना करना स्पष्ट रूप से उनके तानाशाही रवैये को दर्शाता है।
आयुक्त के आदेश के प्रमुख बिंदु
लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश के तहत कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए थे, जिनमें प्रमुख हैं:
उच्च पद पर कार्यरत लोकसेवक को कोई अतिरिक्त भत्ते या पदोन्नति का अधिकार नहीं होगा।
कार्यभार ग्रहण करने वाले लोकसेवक को संबंधित पद की समस्त शक्तियां प्राप्त होंगी।
उच्च पद प्रभार के लिए निर्धारित योग्यताएं पूरी करना अनिवार्य है।
कार्यमुक्ति और कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निगरानी में की जाएगी।
यदि लोकसेवक ने निर्धारित योग्यताएं पूरी नहीं की, तो आदेश स्वतः निरस्त माना जाएगा।
इन निर्देशों के बावजूद, प्राचार्य ने इस आदेश का पालन नहीं किया और शिक्षक को कार्यभार ग्रहण नहीं कराया, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
जिला शिक्षा अधिकारी के नोटिस की अनदेखी
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 9 अगस्त 2024 और 10 अगस्त 2024 को दो नोटिस जारी किए गए थे, जिनमें स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया था कि चितरंजन प्रसाद मिश्र को उच्च पद पर कार्यभार ग्रहण कराया जाए। इसके बावजूद प्राचार्य ने इन नोटिसों को नजरअंदाज किया और शिक्षक को पदस्थापित नहीं किया। यह इस बात का प्रमाण है कि प्राचार्य अपनी तानाशाही को लेकर किसी प्रकार की जवाबदेही से बच रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर असर
प्राचार्य द्वारा लोक शिक्षण संचालनालय के आदेशों की अनदेखी और जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशों की अवहेलना करने से शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इस प्रकार की लापरवाही से न केवल शिक्षक की कार्य क्षमता प्रभावित होती है, बल्कि छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है। शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार की तानाशाही और प्रशासनिक लापरवाही से माहौल बिगड़ सकता है।
यह स्पष्ट है कि प्राचार्य ओमप्रकाश पाठक आयुक्त के आदेशों और जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस मामले में शीघ्र ही उच्च अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए ताकि शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन बनाए रखा जा सके और छात्रों को एक उचित शैक्षिक वातावरण मिले।








