आंगनबाड़ी केंद्रों में फर्जी उपस्थिति पर लगाम: फेस रिकग्नीशन सिस्टम से होगी निगरानी
भोपाल।
आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर पोषण आहार वितरण में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए सरकार ने एक नई तकनीकी व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली है। अब केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति की पुष्टि के लिए फेस रिकग्नीशन सिस्टम (Face Recognition System) का उपयोग किया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत बच्चे को मशीन के सामने चेहरा दिखाना होगा, तभी उपस्थिति दर्ज मानी जाएगी। उपस्थिति के आधार पर ही पोषण आहार का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।
धार जिले में इस सिस्टम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दो महीने पहले लागू किया गया है। वहां के 3800 आंगनबाड़ी केंद्रों में यह तकनीक परीक्षण के तौर पर शुरू हुई है। यदि यह प्रयास सफल रहता है तो इसे प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा।
फेस रिकग्नीशन सिस्टम के माध्यम से हर दिन की उपस्थिति का डेटा सीधे डैशबोर्ड पर उपलब्ध रहेगा, जिससे गड़बड़ी की संभावना न्यूनतम होगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सिस्टम में आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त फीचर भी जोड़े जाएंगे।
विशेष बात यह है कि गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य कारणों के चलते फेस रिकग्नीशन की अनिवार्यता से छूट दी जाएगी।
पोषण आहार व्यवस्था में बदलाव:
- 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों को बना-बनाया भोजन दिया जाएगा।
- 3 से 6 वर्ष के बच्चों को स्थानीय स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार किया गया ताजा भोजन मिलेगा।
- मोटे अनाजों को भी पोषण आहार में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने स्थानीय स्तर पर पोषक अनाजों को बढ़ावा देने के लिए यह निर्देश जारी किए हैं।
अब बात करते हैं फोटो की:
इस समाचार के साथ कौन-सी फोटो सबसे उपयुक्त रहेगी:
- आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों की फोटो (जैसे बच्चे भोजन करते हुए या खेलते हुए)।
- फेस रिकग्नीशन सिस्टम का डेमो फोटो (जिसमें कोई बच्चा मशीन के सामने खड़ा दिखे)।
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को भोजन देते हुए की फोटो।
- डैशबोर्ड स्क्रीन पर उपस्थिति रिकॉर्ड दिखाने वाली सांकेतिक फोटो।









