सीधी: जल जीवन मिशन में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, EE त्रिलोक सिंह बरकड़े तत्काल प्रभाव से निलंबित

सीधी/भोपाल।
सीधी जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत भारी अनियमितताओं और लापरवाही के चलते कार्यपालन यंत्री (EE) त्रिलोक सिंह बरकड़े को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा 22 अप्रैल 2025 को हुई समीक्षा बैठक के बाद की गई है। आदेश के अनुसार, बरकड़े को जबलपुर स्थित कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है और उन्हें मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
22 अप्रैल को आयोजित बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि सीधी जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर जल जीवन मिशन की योजनाएं केवल कागजों पर ही चल रही थीं। “हर घर जल” योजना में स्थल निरीक्षण और अनुमोदन प्रक्रिया में भारी अनियमितता, आपरदर्शिता और लापरवाही उजागर हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि बिना कार्य किए भुगतान दर्शाए गए और योजनाओं की मॉनिटरिंग में भी लापरवाही बरती गई।
राज्य शासन का आदेश साफ:
राज्य शासन के आदेश में यह साफ उल्लेख है कि EE बरकड़े की लापरवाही से योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और शासन की छवि को नुकसान पहुंचा। इस आधार पर उन्हें मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
क्या कहता है विभागीय आदेश?
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अपर सचिव अभिषेक सिंह द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में निलंबन अवधि में त्रिलोक सिंह बरकड़े को जबलपुर क्षेत्रीय कार्यालय से संबद्ध किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वे बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे।
क्यों है यह कार्रवाई महत्वपूर्ण?
जल जीवन मिशन प्रधानमंत्री की प्राथमिक योजना है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों को नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना शामिल है। सीधी जिले में इस योजना को लेकर हुए फर्जीवाड़े और लापरवाही ने शासन को झकझोर कर रख दिया है।
जिम्मेदारों पर होगी और कार्रवाई?
सूत्रों की मानें तो विभाग अब अन्य तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारियों की भी जांच कर सकता है, जो इस घोटाले में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल रहे हैं। यह मामला भ्रष्टाचार और योजनाओं के नाम पर घोटालों को लेकर गंभीर संकेत देता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां यह सुविधाएं सबसे जरूरी हैं।








