एमपी में दो IAS अफसरों पर गंभीर आरोप
इंदौर/भोपाल।
मध्यप्रदेश में दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त संगठन ने जांच प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि इंदौर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में नियमों को ताक पर रखकर एक संविदा इंजीनियर को नगर निगम में भवन अधिकारी नियुक्त किया गया। जिन अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई हुई है, उनमें नगर निगम इंदौर की पूर्व आयुक्त और वर्तमान में कौशल विकास केंद्र की निदेशक हर्षिका सिंह, तथा इंदौर स्मार्ट सिटी के CEO दिव्यांक सिंह शामिल हैं।
क्या है मामला?
लोकायुक्त को मिली शिकायत के अनुसार, हर्षिका सिंह ने 5 जून 2023 को देवेश कोठारी नामक संविदा इंजीनियर को नगर निगम के जोन-13 का भवन अधिकारी नियुक्त किया, जबकि कोठारी निगम का स्थायी कर्मचारी नहीं थे। वे वर्ष 2017 से इंदौर स्मार्ट सिटी में सहायक यंत्री (संविदा) पद पर कार्यरत थे। भवन अधिकारी बनने के लिए राज्य शासन द्वारा निर्धारित शर्तों को भी कोठारी पूरा नहीं करते थे।
भवन अधिकारी बनकर की कार्रवाई
कोठारी ने अपनी नियुक्ति के दौरान छह माह में 250 से अधिक भवन नक्शों को स्वीकृति दी और सैकड़ों नोटिस जारी किए, लेकिन किसी भी मामले में विधिवत कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता — एक पूर्व पार्षद — का आरोप है कि यह नियुक्ति अवैध लाभ कमाने के उद्देश्य से की गई थी। इसके लिए हर्षिका सिंह और दिव्यांक सिंह दोनों की संलिप्तता को जिम्मेदार बताया गया है।
लोकायुक्त की जांच प्रारंभ
भोपाल स्थित लोकायुक्त मुख्यालय में शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच कर कुछ लोगों के बयान दर्ज किए गए। साक्ष्य मिलने के बाद अब आधिकारिक रूप से जांच प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार, अब संबंधित दस्तावेजों की जांच कर साक्ष्य जुटाए जाएंगे और यदि अपराध की पुष्टि होती है, तो आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक हलकों में हलचल
इस कार्रवाई के बाद राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हलचल है। क्योंकि दोनों ही अधिकारी महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं और राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं से जुड़े रहे हैं।









