???? सीधी के बस्तुआ में भालू का खूनी हमला: तीन ग्रामीणों की मौत, दो घायल – गुस्साए ग्रामीणों ने भालू को मार गिराया, जनप्रतिनिधियों ने जताया आक्रोश, मुआवज़े की मांग तेज
✍️ सीधी, 7 जुलाई 2025 | कुसमी
सीधी जिले के धौहनी विधानसभा अंतर्गत ग्राम बस्तुआ में सोमवार की सुबह एक जंगली भालू के हमले ने कोहराम मचा दिया। हमले में तीन ग्रामीणों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हैं। इस हृदयविदारक घटना के बाद गांव में आक्रोश फूट पड़ा और ग्रामीणों ने भालू को मार डाला।

???? सुबह 6 बजे भैंस पर हमले से शुरू हुआ खूनी संघर्ष
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बब्बू यादव की पालतू भैंस पर भालू ने हमला किया। उसे बचाने पहुंचे बब्बू यादव (80), संतोष यादव (43), दीनबंधु साहू (65), मनीष साहू (23) और तेजबली सिंह (65) पर भी भालू ने हमला कर दिया।
- बब्बू यादव और दीनबंधु साहू की मौके पर मौत
- संतोष यादव की मौत जिला अस्पताल में इलाज के दौरान
- मनीष साहू और तेजबली सिंह का इलाज रीवा मेडिकल कॉलेज में जारी

⚔️ भालू को ग्रामीणों ने पीट-पीटकर मार डाला
तीन ग्रामीणों की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने भालू को घेर कर लाठियों, कुल्हाड़ियों व पत्थरों से हमला कर मार डाला। घटना के बाद गांव में मातम और गुस्से का माहौल है।
????️ नेताओं ने जताया दुख, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
➤ प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल
- मृतकों के परिवार को ₹25,000, घायलों को ₹10,000 की तत्काल सहायता की घोषणा
- प्रशासन को समुचित इलाज और भविष्य की रोकथाम के निर्देश

➤ धौहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम
- पीड़ित परिवारों से मिलकर संवेदना जताई
- मुख्यमंत्री से ₹25-25 लाख की सहायता राशि की मांग
- कहा: “यह वन विभाग की घोर लापरवाही का नतीजा है।”
➤ पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल (कांग्रेस)
- घटना को बताया “प्रशासनिक असफलता का परिणाम”
- कहा:
“संजय टाइगर रिज़र्व के बफ़र जोन में लगातार हमले हो रहे हैं, सरकार केवल मुआवज़ा देकर कर्तव्यों से नहीं बच सकती। जरूरत है संरचनात्मक बदलाव और पुख्ता फेंसिंग व निगरानी की।”

➤ सांसद डॉ. राजेश मिश्रा
- शोक जताया, सहयोग का आश्वासन
???? प्रशासन ने राहत कार्य शुरू किए
- कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी और एसपी डॉ. रविन्द्र वर्मा ने संज्ञान लिया
- एसडीएम आर.पी. त्रिपाठी ने घटनास्थल पहुंचकर राहत का नेतृत्व किया
अब तक की राहत:
- वन विभाग: ₹10,000 प्रति मृतक + ₹8 लाख की सहायता की प्रक्रिया
- पंचायत: ₹5,000 + खाद्यान्न (50 किलो चावल, 50 किलो गेहूं)
- विधायक और मंत्री की व्यक्तिगत सहायता
- जन सहयोग से राहत सामग्री
⚠️ बफ़र जोन में ग्रामीणों की सुरक्षा अब बड़ा सवाल
नेताओं और ग्रामीणों ने एक सुर में बफ़र जोन में फेंसिंग, निगरानी कैमरे, वन अमले की तैनाती और सतर्कता की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि संजय टाइगर रिज़र्व प्रबंधन लगातार चेतावनी के बावजूद उदासीन बना रहा, जिसका खामियाज़ा अब मासूम जानों से चुकाना पड़ा।
???? निष्कर्ष:
बस्तुआ की यह घटना न सिर्फ वन्यजीव हमले की त्रासदी है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है –
क्या जंगल के किनारे बसे नागरिकों की जान की कीमत इतनी सस्ती है कि हर बार मुआवज़े से समाधान तलाशा जाएगा?
सरकार और वन विभाग को नीतिगत हस्तक्षेप और सुरक्षा प्रणाली को सख्त करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने होंगे।








