केरल में हाल ही में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के कड़े ड्रेस कोड नियमों के लागू होने के बाद छात्रों में ‘NEET-फ्रेंडली’ कपड़ों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। अधिकारियों ने मेटल फास्टनिंग, परतदार कपड़े और एसेसरीज पर पूरी तरह से रोक लगा दी है, जिससे छात्र परीक्षा के अनुसार उपयुक्त और नियमों के अनुरूप कपड़े तलाशने को मजबूर हैं।
नए नियमों के तहत, छात्रों को परीक्षा केंद्र पर मेटल होल्डिंग वाले जूते, बेल्ट, गहने, घड़ियां या परतदार वस्त्र पहनने की अनुमति नहीं है। इसके चलते केरल में कई कपड़ा विक्रेता और डिजाइनर अब खास तौर पर ‘NEET-फ्रेंडली’ यानी परीक्षा अनुकूल कपड़ों का कस्टम उत्पादन कर रहे हैं। इनमें हल्के, सादे, बिना मेटल फास्टनिंग वाले वस्त्र प्राथमिकता से विकसित किए जा रहे हैं ताकि विद्यार्थी आसानी से परीक्षा केंद्र की आवश्यकताओं का पालन कर सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस नए ट्रेंड ने केरल के बाजार में एक नया निच क्षेत्र तैयार कर दिया है, जो मौसमी मांगों और परीक्षा के सत्र के अनुसार तेजी से बढ़ रहा है। मार्केट एनालिस्ट्स के अनुसार, यह बदलाव न केवल छात्रों के लिए सुविधाजनक है बल्कि स्थानीय व्यापारियों के लिए भी आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो रहा है।
माता-पिता और अभिभावक भी इस बदलाव को सकारात्मक रूप से देख रहे हैं क्योंकि वे चाहते हैं कि उनके बच्चे बिना किसी तकनीकी असुविधा या नियम उल्लंघन के परीक्षा में भाग लें। स्कूल और कोचिंग संस्थान भी छात्रों को सही ड्रेस कोड अपनाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
सरकार के अधिकारी इन स्टाइलिश लेकिन नियम के अनुसार सुरक्षित कपड़ों को लेकर छात्रों से आवश्यक सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं ताकि परीक्षा का माहौल व्यवस्थित और निष्पक्ष बना रहे। इसके अलावा, सुरक्षा कारणों की मजबूती और परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम आवश्यक बताया गया है।
इस तरह के नियम छात्रों की मानसिक चिंता को भी कम कर रहे हैं क्योंकि अब वे परीक्षा के दौरान ड्रेस को लेकर अतिरिक्त तनाव का सामना नहीं करते। इस नयी पहल ने केरल के फैशन उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है और आने वाले समय में ऐसे कपड़ों की मांग और बढ़ने की संभावना है।








