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सड़क पर दूध के साथ बहा खून,अडानी के ट्रेलर ने छीनी दूधवाले की जान, सुरक्षा व्यवस्था शून्य

सड़क पर दूध के साथ बहा खून,अडानी के ट्रेलर ने छीनी दूधवाले की जान, सुरक्षा व्यवस्था शून्य

???? संवाददाता, सिंगरौली
परसौना-रजमीलान मार्ग एक बार फिर खून से लाल हो गया। अडानी कंपनी के कोयला परिवहन में लगे एक बेलगाम ट्रेलर ने सोमवार को एक निर्दोष दूध विक्रेता को कुचल दिया। हादसा इतना भीषण था कि युवक की मौके पर ही मौत हो गई। यह कोई पहली घटना नहीं है — बल्कि इस मार्ग पर लगातार हो रही दुर्घटनाएं अब आमजन के धैर्य की परीक्षा ले रही हैं।

बेलगाम ट्रेलर, मौन जिम्मेदार

मृतक, जो कि स्थानीय निवासी था, रोज की तरह सुबह दूध वितरण के लिए निकला था। लेकिन अडानी कंपनी के तेज रफ्तार ट्रेलर ने उसकी जीवनलीला समाप्त कर दी। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि ट्रेलर की रफ्तार बहुत ज्यादा थी और चालक नशे में था।

गांव की जमीन ली, सुरक्षा नहीं दी

ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि अडानी कंपनी ने वर्षों पहले उनकी जमीन अधिग्रहित की थी, लेकिन बदले में न तो स्थायी रोजगार मिला और न ही किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा। अब जो लोग छोटी-छोटी रोज़गार गतिविधियों से अपना गुजारा कर रहे हैं, वे कंपनी के भारी वाहनों की चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं।

प्रशासन और कंपनी की चुप्पी

स्थानीय लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक आमजन इन बेलगाम ट्रेलरों की भेंट चढ़ते रहेंगे?
➡️ मार्ग पर न तो कोई ट्रैफिक नियंत्रण व्यवस्था है,
➡️ न स्पीड लिमिट का पालन होता है,
➡️ और नशे में वाहन चलाने वालों पर कोई कार्रवाई

आक्रोशित जनता का चक्काजाम, आंदोलन की चेतावनी

घटना के बाद ग्रामीणों ने परसौना-रजमीलान मार्ग पर चक्का जाम कर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि यदि जल्द से जल्द—
???? मृतक परिवार को मुआवजा नहीं मिला,
???? ट्रैफिक सुरक्षा व्यवस्था लागू नहीं की गई,
???? और सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू नहीं हुआ,
तो वे बड़े स्तर पर जनआंदोलन शुरू करेंगे।

क्या यही विकास की कीमत है?

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं — क्या विकास के नाम पर गरीबों की जान यूं ही जाती रहेगी? क्या बड़ी कंपनियों को इतनी छूट है कि वे जनजीवन की कीमत पर भी बेलगाम दौड़ सकती हैं?

???? अब वक्त है कि शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधि और कंपनियां इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान दें — वरना आने वाले समय में यह आक्रोश एक बड़ी जनक्रांति में बदल सकता है।


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