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चितरंगी की ‘खैर-खबर’: लकड़ी तस्करों की ट्रक ने खाई में छलांग लगाई, पुलिस बोली – “वाह रे किस्मत!”

चितरंगी की ‘खैर-खबर’: लकड़ी तस्करों की ट्रक ने खाई में छलांग लगाई, पुलिस बोली – “वाह रे किस्मत!”
✍️ व्यंग्य विशेष | 

चितरंगी (सिंगरौली)
बेशकीमती खैर की लकड़ी से लदा एक ट्रक अपनी ज़िम्मेदारी बखूबी निभाते हुए सीधे खाई में जाकर गिर पड़ा, मानो खुद ही आत्मसमर्पण करने चला गया हो। पुलिस मौके पर पहुँची तो लकड़ी मुस्कराते हुए बोली – “आख़िर अब हमें भी सरकार की गोद मिल ही गई!”

कहा जा रहा है कि ट्रक तस्करों का था, पर ट्रक की चालाकी देखिए – न चालक मिला, न कंडक्टर, सिर्फ लकड़ी और पुलिस आमने-सामने। कुछ लोगों का मानना है कि ट्रक को ईमानदारी का दौरा पड़ा था, इसलिए खाई में जाकर खुद को कानून के हवाले कर दिया।

पुलिस के उच्च अधिकारियों ने जब सुना कि ट्रक में खैर की लकड़ी है, तो पुलिस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा – आखिरकार लकड़ी खुद चलकर (या गिरकर) पकड़ में जो आई!

थाना प्रभारी  और उनकी टीम ने मौके पर पहुंचते ही लकड़ी को देखा, माथा खुजाया और बोले – “चलो कम से कम आज बिना पीछा किए ही गिरफ्तारी हो गई।”

सूत्र बताते हैं कि यह वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कुंडली का ऐसा योग था, जिसमें लकड़ी खुद ही ‘ग्रह-नक्षत्र’ देख गिर गई।

अब पुलिस उस “अदृश्य चालक” की तलाश में है, जो संभवतः लकड़ी का आत्मा-रूपी मित्र था और हरियाली का दुश्मन। मामला दर्ज हो चुका है और खोजबीन तेज़ है, हालांकि ट्रक अभी भी सोच में डूबा है कि – “मुझे क्यों छोड़ा, मालिक?”

???? इसे कहते हैं ‘खैरियत’ वाली कार्रवाई, जिसमें ना किसी के पांव भागे, ना कोई पीछा हुआ – बस तस्करी खुद गिरकर उजागर हो गई।

???? वन विभाग भी यही सोच रहा है कि – अगर सब ट्रक ऐसे ही गिरने लगे, तो जंगल बचाना कितना आसान हो जाएगा!

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