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सांसद जी की रेड: राजनीति का असली अखाड़ा

सांसद जी की रेड: राजनीति का असली अखाड़ा

साहब की फुर्ती ऐसी कि खिलाड़ियों को भी लगा—“अरे ये तो सीधे संसद से ट्रेनिंग लेकर आए हैं।”

जी हां सिंगरौली के आंबेडकर स्टेडियम, एनटीपीसी विंध्यनगर का नज़ारा रविवार को कुछ और ही था। मंच पर भाषण और मैदान में खिलाड़ियों की जूझारू भिड़ंत तो आम बात रही, पर इस बार असली आकर्षण वो क्षण था जब सांसद डॉक्टर राजेश मिश्रा खुद कबड्डी के अखाड़े में कूद पड़े।

रेड करते वक्त उनकी फुर्ती देखकर ऐसा लगा मानो संसद का मोर्चा हो और विपक्ष को घेरना हो। ‘कबड्डी, कबड्डी, कबड्डी’ की जगह कानों में जैसे गूंज रहा था—‘विकास, विकास, विकास’।

राजनीति और कबड्डी का एक जैसा दांव

कबड्डी में नियम है कि रेडर तब तक मैदान में रहेगा जब तक सांस चलती है और आवाज़ निकलती है। राजनीति में भी वही हाल है—जब तक जनता का समर्थन और गठबंधन की ऑक्सीजन है, नेता की रेड जारी रहती है।
सांसद जी ने जिस जोश से विपक्षी टीम पर धावा बोला, देखने वालों को लगा कि मानो कह रहे हों—“किसी का जाना तय है तभी किसी का आना होगा।” यही राजनीति का भी तो मूलमंत्र है—कबड्डी में भी और सत्ता की कुर्सी पर भी।

लंबा इंतजार और पटकनी का सुख

कहते हैं राजनीति में जीत उन्हीं को मिलती है, जो धैर्य रखकर मौके का इंतजार करते हैं। सांसद जी की इस रेड में वो दर्शन भी साफ दिखा—पहले मैदान का मुआयना, फिर धीरे-धीरे बढ़ना और आखिर में मौका मिलते ही विरोधी को पकड़ लेना। दर्शकों में बैठे बुज़ुर्ग फुसफुसाते सुने गए—“अरे, यही तो सांसद बनने की असली ट्रेनिंग है, न जाने कितनों को पटकनी देने के बाद ही तो ये मौका मिला है।”

नेतागण और जनता की सीख

मंच पर मंत्री राधा सिंह, विधायक रामनिवास साह, विधायक राजेंद्र मेश्राम और जिला अध्यक्ष सुंदरलाल साह ने भी तालियां बजाकर सांसद जी का उत्साह बढ़ाया। पर असली सबक तो युवाओं के लिए था—“खेल हो या राजनीति, धैर्य रखो, टीमवर्क करो और वक्त आने पर पूरा दम लगाकर विरोधी को चित्त कर दो।”

कबड्डी से राजनीति तक…

डॉक्टर साहब की रेड ने साबित कर दिया कि कबड्डी सिर्फ खेल नहीं, बल्कि राजनीति की परछाई है—

  • विपक्ष को घेरना हो तो चपलता चाहिए।
  • सत्ता की सीमा लांघनी हो तो सांस लंबी चाहिए।
  • और किसी को बाहर करना हो तो दांव पक्का चाहिए।

स्टेडियम की भीड़ में किसी ने सही ही कहा—“वाह! कबड्डी और राजनीति में फर्क ही क्या है, दोनों में जीत के लिए विरोधी को गिराना अनिवार्य है।”

मैदान छोटा था लेकिन संदेश बड़ा: “खेल में विरोधी गिरा तो अंक, राजनीति में विरोधी गिरा तो सत्ता।”

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