सिंगरौली बना सिंगापुर – बस सड़कें दुबई की रेत जैसी!
सिंगरौली- कभी “ऊर्जा की राजधानी” कहलाने वाला सिंगरौली अब “गड्ढों की राजधानी” बनता जा रहा है। देवसर-कोहरा खोह मार्ग पर जब एक विशाल ट्रेलर बीच सड़क में फंस गया, तो लगा जैसे विकास खुद किसी गड्ढे में उतर गया हो और निकलने की कोशिश कर रहा हो।
कहते हैं यह वही सड़क है, जिसका भूमि पूजन कई बार हो चुका है — इतना कि अगर गड्ढों की जगह नारियल गाड़े जाते, तो अब तक सड़क नहीं, मंदिर बन गया होता! लेकिन अफसोस, यहाँ नारियल तो फूटे पर सड़क नहीं बनी।
स्थानीय लोग बताते हैं कि यह “सड़क” नहीं बल्कि “स्मारक” है — लापरवाही, भ्रष्टाचार और वादों की एक साथ निशानी। मंत्री जी ने भी मान लिया था कि सड़क बनाना कठिन काम है, पर शायद यह स्वीकारोक्ति भी अब विकास के रिकॉर्ड में दर्ज होकर सो रही है।
कुछ महीनों पहले 10 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। जनता कहती है, “कहां गए ये पैसे?” — और विभाग कहता है, “फाइल आगे बढ़ गई है”। बस फर्क इतना है कि फाइल तो मंत्रालय पहुंच गई, पर ट्रेलर अभी भी सड़क पर अटका है।
यह वही सिंगरौली है जिसे नेता मंचों पर “सिंगापुर” कहते नहीं थकते। फर्क बस इतना है कि सिंगापुर में सड़कें लोगों को जोड़ती हैं, और सिंगरौली में सड़कें लोगों को घंटों जाम में तोड़ देती हैं।
यहाँ सड़कें इतनी टूटी हैं कि लोग अब इन्हें “नेचुरल स्पीड ब्रेकर” कहते हैं — मुफ़्त में झूला झूलने का अनुभव और बोनस में धूल का फेशियल!
जनता अब मज़ाक में कहती है —
“सिंगरौली का विकास देखना है तो बारिश में निकलो, सड़क नहीं दिखेगी पर तैराकी मुफ्त में हो जाएगी!”
सवाल वही है — जब सड़क के लिए पैसा, योजना और मंत्री सब मौजूद हैं, तो फिर सड़क कहाँ है?
शायद वो भी ट्रेलर के नीचे फंसी हुई है!








