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सीधी नगर पालिका में ‘मिनी’ प्रशासन, ‘मैक्सी’ भ्रष्टाचार!

सीधी नगर पालिका में ‘मिनी’ प्रशासन, ‘मैक्सी’ भ्रष्टाचार!
कर्मचारियों की खून-पसीने की कमाई हवा—CMO पर लगा 18 लाख के एरियर और PF गबन का आरोप

सीधी-नगर पालिका परिषद सीधी इन दिनों सुर्खियों में नहीं, बल्कि व्यंग्य की किताबों में जगह पाने के योग्य उदाहरण बन चुकी है। वजह—यहां के आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन, पीएफ और एरियर का हाल देखकर कोई भी समझ सकता है कि नगरपालिका विभाग नहीं, बल्कि “अंधे पोए कुत्ते खाएं, कुछ कहे तो लात पाए” वाली व्यवस्था चल रही है।

कर्मचारी दिनभर शहर की गंदगी साफ करें, कचरा उठाएं, नाले में उतरें, लेकिन जब वेतन की बात करें तो अधिकारियों का जवाब—“ठेकेदार से पूछो!” और ठेकेदार का जवाब—“साहब से पूछो!”
इस बीच कर्मचारी पूछते ही रह जाते हैं—हम पूछें किससे?

■ मिनी के मन को न भाए मजदूर, वेतन-PF हवा

नगर पालिका की सीएमओ मिनी अग्रवाल पर आरोपों की सूची इतनी लंबी है कि इसे पढ़कर कोई भी पूछ बैठे—
क्या यह नगरपालिका है या ‘नो पेमेंट नगर निगम’?

  • 2022 से सैकड़ों कर्मचारियों का PF नहीं जमा
  • ERIS में अपडेट नहीं
  • 18 लाख रुपए एरियर जारी तो हुए, पर कर्मचारियों तक पहुंचे नहीं
  • आउटसोर्स एजेंसी और नगरपालिका पर संयुक्त “हिसाब-किताब” करने का आरोप
  • वेतन भी डेढ़-दो महीने में “किस्मत” के भरोसे मिलता है

और कर्मचारी?
“साहब यहां बहुत भौसा है… कुछ कहो तो नौकरी से निकलवा दिए जाओ।”

■ कर्मचारी बोले—“तेल सरकारी, घूमे गाड़ी ग्वालियर तक!”

कर्मचारी बताते हैं कि नगरपालिका की गाड़ियों का तेल जनता की सेवा में कम और “व्यक्तिगत यात्राओं” में ज्यादा खर्च होता है।
परिंदों के सकोरे में पानी तक भरना भारी पड़ता है, लेकिन सरकारी गाड़ियां नपा सीमा से ग्वालियर तक भ्रमण कर आती हैं।

■ सोशल मीडिया पर खुली पोल—“यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है”

एक युवा समाजसेवी ने कहा—
“सरकार ने ERIS सिस्टम इसलिए बनाया था कि PF पारदर्शी रहे, लेकिन यहां तो सिस्टम को ही सिस्टम में डाल दिया गया है।”

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की—

  1. PF की मासिक ERIS रिपोर्ट अनिवार्य की जाए
  2. PF लेट जमा करने पर सख्त कार्रवाई
  3. हर कर्मचारी को SMS अलर्ट अनिवार्य

उनका सीधा संदेश—
“EPF कर्मचारी का हक है, उपकार नहीं।”

■ 18 लाख के एरियर का ‘गायब होना’—जादू या प्रबंधन?

राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के प्रदेश महासचिव सुनील चौधरी ने आरोप लगाया कि—

  • 126 कर्मचारियों के लिए दो माह पूर्व 18 लाख रुपए एरियर भेजे गए
  • लेकिन किसी कर्मचारी को एक रुपया तक नहीं मिला
  • CMO और आउटसोर्स एजेंसी ने मिलकर राशि “हजम” कर ली

उन्होंने इसे सीधे-सीधे आर्थिक अपराध बताया है और CMO मिनी अग्रवाल को निलंबित करने की मांग की है।

■ टेंडर मुद्दा—“जिनका संरक्षण हो, उनकी ही चलेगी”

आरोप यह भी हैं कि—

  • आउटसोर्स कंपनी इथोस सिक्योरिटी सर्विस की निविदा अवधि समाप्त हो चुकी
  • दूसरी कंपनियों ने टेंडर डाले, लेकिन खोले नहीं गए
  • कारण—कथित संरक्षण
  • परिणाम—अक्टूबर का वेतन भी अटका

कर्मचारियों पर भूखे मरने की नौबत, और विभाग चुप!

■ आवाज उठाओ तो नौकरी खतरे में

कर्मचारी कहते हैं—
“अगर मिनी मैडम से बात करो तो नौकरी से निकालने की धमकी मिलती है… कईयों को निकाल भी दिया।”

जिले में चर्चा यह है कि नगरपालिका में काम करने के लिए योग्यता नहीं, चुप रहने की क्षमता ज्यादा जरूरी है।

 जनता की गंदगी साफ करने वाले कर्मचारी, और उनकी पगार साफ कर देने वाले अधिकारी—सीधी नगर पालिका ‘उलटी गंगा’ का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है।

अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री शिकायत सुनेंगे या यह भी नगरपालिका की टूटी नाली की तरह बस बहकर रह जाएगा?

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