औषधीय खेती को बढ़ावा देने हेतु सिंगरौली जिले में निःशुल्क अश्वगंधा पौध एवं बीज वितरण अभिया
सिंगरौली-सिंगरौली जिले के देवसर विकासखंड की ग्राम पंचायत महोली में अश्वगंधा जन-जागरूकता एवं पौध वितरण कार्यक्रम
औषधीय खेती को प्रोत्साहित करने तथा ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत सिंगरौली जिले के देवसर विकासखंड की ग्राम पंचायत महोली में निःशुल्क अश्वगंधा पौध एवं बीज वितरण सह जन-जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम प्रगति फाउंडेशन, ग्वालियर द्वारा आयोजित किया गया, जिसे राष्ट्रीय औषधीय पौध बोर्ड (NMPB), नई दिल्ली, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से संपन्न कराया गया। कार्यक्रम की परिकल्पना “अश्वगंधा – एक स्वस्थ राष्ट्र के लिए: परंपरा से आधुनिक विज्ञान की ओर” विषय पर आधारित रही, जिसका उद्देश्य औषधीय खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जन-जन तक पहुँचाना था।
इस कार्यशाला में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें आदिवासी समुदायों, अनुसूचित जाति/जनजाति के किसान, महिला स्वयं सहायता समूह (SHG), ग्रामीण युवा एवं छात्र-छात्राओं का प्रतिनिधित्व शामिल था। विशेष रूप से आदिवासी एवं एस.सी./एस.टी. समुदायों की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता रही।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को अश्वगंधा के पौधे एवं बीज निःशुल्क वितरित किए गए। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को औषधीय पौधों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना, ग्रामीण युवाओं को स्वरोज़गार के अवसर उपलब्ध कराना तथा पारंपरिक खेती के साथ-साथ आयवर्धक वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देना रहा।
इस अवसर पर प्रगति संस्था के सचिव श्री प्रमोद साहू, सहयोगी श्री शिवेन्द्र सिंह एवं संस्था के तकनीकी सहायक ने ग्राम पंचायत महोली में उपस्थित किसानों के बीच अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि,
“प्रगति संस्था का संकल्प है कि बघेलखंड क्षेत्र के ग्राम-ग्राम तक औषधीय खेती का प्रचार-प्रसार किया जाए। वैज्ञानिक तकनीकों को सरल बनाकर किसानों की आय बढ़ाना तथा अश्वगंधा जैसी औषधीय फसलों के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता है।”
अश्वगंधा का औषधीय एवं आर्थिक महत्व
अश्वगंधा एक अत्यंत महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग आयुर्वेद में रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, तनाव कम करने, शारीरिक एवं मानसिक शक्ति सुधारने, अनिद्रा, जोड़ों के दर्द तथा सामान्य दुर्बलता जैसी समस्याओं में किया जाता है। आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान भी इसके औषधीय गुणों की पुष्टि करते हैं।
कृषि की दृष्टि से अश्वगंधा एक ऐसी फसल है, जो कम पानी, कम लागत और कम जोखिम में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है। इसकी खेती से किसान धान और गेहूँ जैसी पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार औषधीय खेती के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाकर प्रधानमंत्री की “किसानों की आय दोगुनी करने” की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।
संस्था का दीर्घकालिक उद्देश्य प्रगतिशील किसानों, एस.सी./एस.टी. एवं आदिवासी समुदायों के ग्रामीण युवाओं को औषधीय फसलों की वैज्ञानिक खेती की आधुनिक पद्धतियों से प्रशिक्षित करना है, ताकि वे बीज से बाज़ार तक (Seed to Market) की संपूर्ण प्रक्रिया को समझ सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
यह जन-जागरूकता पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए रोज़गार सृजन, समाज को स्वास्थ्य लाभ तथा बघेलखंड क्षेत्र में औषधीय खेती के विस्तार की दिशा में एक प्रभावशाली और प्रेरणादायी कदम के रूप में देखी जा रही है।








