ज़हरीली होती हवा ने बढ़ाई चिंता, मध्यप्रदेश के 8 शहरों की सांस पर खतरा
एनजीटी ने राज्य सरकार से मांगा जवाब, प्रदूषण पर सख्त कदमों की जरूरत
मध्यप्रदेश में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। प्रदेश के 8 प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है, जिससे आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। राजधानी भोपाल सहित इन शहरों की हवा अब सांस लेने लायक नहीं रह गई है। हालात को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।NGT ने पाया है कि प्रदेश के आठ शहर — भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, देवास और सिंगरौली — राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को लगातार पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इन शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स लंबे समय से “नॉन-अटेनमेंट” श्रेणी में बना हुआ है, जो दर्शाता है कि हवा में हानिकारक कणों की मात्रा सुरक्षित स्तर से काफी अधिक है।
शरीर के लिए सबसे खतरनाक प्रदूषक पीएम2.5 और पीएम10 का स्तर भी अत्यधिक बढ़ा हुआ है। उदाहरण के लिए, भोपाल में पीएम10 का स्तर कई जगह 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंचा, जो सुरक्षित सीमा से तीन गुना से अधिक है। ऐसे प्रदूषण स्तर से सांस संबंधी समस्याओं, फेफड़ों और हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है।
एनजीटी ने अपने नोटिस में राज्य सरकार से पूछा है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और आगे की कार्ययोजना क्या है। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है।मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता गंभीर रूप से बिगड़ गई है और इसका प्रभाव लोगों की सेहत पर खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने सोमवार को राज्य सरकार और संबंधित विभागों को वायु प्रदूषण की स्थिति पर छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता वाहनों का दबाव, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने जैसी गतिविधियां वायु प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। ठंड के मौसम में हवा की गति कम होने से स्मॉग की समस्या और भी गंभीर हो जाती है।
सीधी, रीवा, सिंगरौली जैसे विंध्य क्षेत्र के शहरों में भी वायु गुणवत्ता में गिरावट देखने को मिल रही है। यहां तेजी से बढ़ते शहरीकरण, खनन गतिविधियों और यातायात के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद ठोस नियंत्रण उपायों का अभाव साफ नजर आता है।
पर्यावरणविदों ने सरकार से अपील की है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, हरित क्षेत्र विकसित करने और औद्योगिक इकाइयों पर सख्त निगरानी की जरूरत बताई जा रही है।
एनजीटी की सख्ती के बाद अब निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि प्रदेशवासियों को साफ हवा मिलेगी या प्रदूषण का यह संकट और गहराएगा।








