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सीधी में नेशनल लोक अदालत में 2153 मामलों का समाधान…

सीधी में नेशनल लोक अदालत का सफल आयोजन, 2153 मामलों का हुआ निराकरण

5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का हुआ आवार्ड, लोगों को मिला त्वरित न्याय

सीधी, 14 मार्च 2026।राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार शनिवार को जिला न्यायालय सीधी सहित सिविल न्यायालय चुरहट, रामपुर नैकिन और मझौली में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का आपसी सहमति से समाधान किया गया, जिससे लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय प्राप्त हुआ।https://sidhi24news.in/archives/28583

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ जिला न्यायालय परिसर स्थित ए.डी.आर. भवन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री प्रयागलाल दिनकर, विशेष न्यायाधीश एवं प्रभारी अधिकारी नेशनल लोक अदालत श्री यतीन्द्र कुमार गुरू, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री बृजेन्द्र सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री मुकेश कुमार शिवहरे सहित अन्य न्यायाधीशों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री दिनकर ने कहा कि नेशनल लोक अदालत सस्ता, सुलभ और शीघ्र न्याय प्राप्त करने का सर्वोत्तम मंच है। यहां पक्षकार आपसी सहमति से विवादों का समाधान कर समय और धन दोनों की बचत कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 की पहली नेशनल लोक अदालत को सफल बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा विभिन्न विभागों के साथ लगातार बैठकें आयोजित की गईं, जिसके परिणामस्वरूप इस लोक अदालत में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त हुई।

22 न्यायिक खंडपीठों का किया गया गठन

जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री मनीष कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रकरणों के निराकरण के लिए जिला मुख्यालय सीधी में 13, व्यवहार न्यायालय चुरहट में 4, मझौली में 2 तथा रामपुर नैकिन में 3 खंडपीठों का गठन किया गया। इस प्रकार कुल 22 न्यायिक खंडपीठों के माध्यम से मामलों का निराकरण किया गया।

2153 प्रकरणों का हुआ समाधान

नेशनल लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित कुल 389 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे और सभी 389 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इसके अलावा 4918 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों में से 1764 प्रकरणों का समाधान किया गया। इस प्रकार कुल 2153 मामलों का निराकरण कर लोगों को राहत प्रदान की गई।

मोटर दुर्घटना दावों में मिली क्षतिपूर्ति

मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों के अंतर्गत 25 मामलों का निराकरण किया गया, जिनमें पीड़ित पक्षकारों को कुल 1 करोड़ 16 लाख 17 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की गई। इसके अलावा चेक बाउंस से संबंधित 23 प्रकरणों में लगभग 1 करोड़ 22 लाख रुपये की राशि का निपटारा किया गया।

बिजली और बैंक वसूली के मामलों में भी हुआ समाधान

विद्युत अधिनियम से संबंधित लगभग 85 लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिससे विभाग को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं 415 प्री-लिटिगेशन विद्युत प्रकरणों का भी समाधान किया गया, जिसमें 52 लाख 39 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

बैंक वसूली के 383 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निपटारा करते हुए विभिन्न बैंकों को 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार 418 रुपये की राशि प्राप्त हुई। वहीं नगरीय निकायों के जलकर से संबंधित 487 मामलों के समाधान से लगभग 5 लाख 7 हजार 880 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

चाचा-भतीजे के विवाद का भी हुआ सौहार्दपूर्ण समाधान

नेशनल लोक अदालत के दौरान कई पारिवारिक विवाद भी सुलझाए गए। व्यवहार वाद क्रमांक 147/2023 रामनारायण बनाम अंकिल बहादुर सिंह के मामले में चाचा और भतीजे के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद आपसी सहमति से समाप्त हो गया। दोनों पक्षों ने लोक अदालत के माध्यम से सौहार्दपूर्ण समझौता कर लिया, जिससे परिवार में फिर से मधुर संबंध स्थापित हो सके।

पक्षकारों को दिए गए फलदार पौधे

नेशनल लोक अदालत में राजीनामा करने वाले पक्षकारों को वन विभाग की ओर से पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ 400 फलदार पौधे भी निःशुल्क वितरित किए गए।

बड़ी संख्या में अधिकारी और अधिवक्ता रहे उपस्थित

कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय श्री दीपक शर्मा, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री बृजेन्द्र सिंह, जिला न्यायाधीश श्री मनीष कुमार श्रीवास्तव, श्री राकेश कुमार सोनी, श्री रविन्द्र कुमार शर्मा, सुश्री उर्मिला यादव सहित कई न्यायाधीश, अधिवक्ता, विद्युत विभाग, बैंक एवं नगरीय निकायों के अधिकारी, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि, पैरालीगल वालेंटियर्स तथा न्यायालय कर्मचारी उपस्थित रहे।

नेशनल लोक अदालत के सफल आयोजन से यह सिद्ध हुआ कि आपसी सहमति के माध्यम से विवादों का समाधान कर न्याय प्रक्रिया को सरल, सुलभ और त्वरित बनाया जा सकता है।https://sidhi24news.in/archives/28573

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