AI से निर्मित गलत सूचना कैसे प्रभावित कर रही है COP30 की छवि?
अमेज़न की एक शहर में कथित भारी बाढ़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो विश्व जलवायु शिखर सम्मेलन COP30 के मेजबान स्थल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। हालांकि, जांच में यह सामने आया है कि यह क्लिप पूरी तरह कृत्रिम है और उसमें दिखाया गया न तो कोई रिपोर्टर है, न ही वहाँ कोई लोग हैं, न ही कोई बाढ़ और न ही वह शहर असल में मौजूद है। यह वीडियो एक बड़े स्तर पर फैल रही गलत सूचना का एक उदाहरण है, जिसे आसानी से एआई की मदद से बनाया गया है।
ऐसे मामले COP30 के इर्द-गिर्द बढ़ते जा रहे हैं, जहां एआई जनित गलत जानकारी लोगों की धारणा को प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार की झूठी सामग्री, विशेषकर वीडियो और फोटोज के रूप में, सम्मेलन की गंभीरता और उसके एजेंडे को कमजोर कर सकती है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर इन्हें फैलाना बेहद आसान हो चुका है, जिससे समझदारी से सूचना का निष्कर्ष निकालना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
जैविक समाचार नेटवर्क और तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, यह रणनीति जानबूझकर लागू की जा रही है ताकि वैश्विक जलवायु कार्रवाई के लिए बनी सहमति को बाधित किया जा सके। ये गलत सूचनाएं जलवायु परिवर्तन पर महत्वपूर्ण नीतियों को लेकर जनता और नेताओं के बीच भ्रम पैदा करती हैं, जिससे योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
क्लाइमेट एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ऐसे दुष्प्रचार से निपटने के लिए सशक्त मीडिया साक्षरता और तकनीकी नियंत्रण आवश्यक हैं ताकि वास्तविक तथ्यों को सही तरीके से जनता तक पहुंचाया जा सके। साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों को भी मंचों पर फैलने वाली फर्जी सूचनाओं पर नजर रखनी होगी।
COP30 के आयोजनकर्ता इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि शिखर सम्मेलन की जानकारी विश्वसनीय स्रोतों से ही प्राप्त करें और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अज्ञात तथा अनप्रमाणित जानकारियों पर भरोसा न करें। उनका कहना है कि इस तरह की गलत सूचनाएं जलवायु संकट के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में खलल डालने के अलावा न्यायसंगत संवाद को भी प्रभावित करती हैं।
इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट किया है कि तेजी से विकसित हो रही तकनीक, जैसे एआई, सही और गलत दोनों तरह की सूचनाओं के प्रसार में पूरी तरह से निर्णायक कारक हो सकते हैं। इसलिए, विश्व स्तर पर जागरूकता बढ़ाना और तकनीकी नियंत्रण तंत्र को मजबूत करना आज की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं बन गई हैं।
अतः COP30 जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मंचों पर सत्य और तथ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर वैश्विक समस्या का प्रभावी समाधान निकाला जा सके और विश्व सामाजिक व पर्यावरणिक रूप से स्थिर भविष्य की ओर अग्रसर हो।








