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सीधी-जंगल सीमा में सड़क बनाकर किया जा रहा है बनास नदी से रेत का कारोबार

जंगल सीमा में सड़क बनाकर किया जा रहा है बनास नदी से रेत का कारोबार

परसिली मे रेत भंडारित कर हाइवा वाहनों से की जाती है सप्लाई

समीपी जिला शहडोल में पिछले मांह रेत माफिया द्वारा की गई पटवारी की हत्या से नहीं लिया गया सबक

सीधी-अभी तक सीधी जिला के समीपी जिला शहडोल के तहसील ब्योहारी अंतर्गत रेत माफियाओं का दहशत सुर्खियों में रहा है जहां पिछले मांह रेत माफिया द्वारा एक पटवारी की वाहन से कुचलकर हत्या कर दी गई थी लेकिन अब सीधी जिला के मझौली तहसील अंतर्गत भी उसी तर्ज पर रेत माफिया अपना साम्राज्य स्थापित कर रहे हैं जिनके हौसले इतने बुलंद है वन सीमा में लगभग 3 किलोमीटर जेसीबी मशीन से सड़क बनाकर बनास नदी से रेत का काला कारोबार किया जा रहा है जिससे वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।
ग्रामीणों द्वारा दी गई सूचना के आधार पर जब मीडिया द्वारा मामले की तहकीकात की गई तो पाया गया कि वन परिक्षेत्र मझौली के बीट चमराडोल अंतर्गत सीधी शहडोल में रोड बनास नदी में बनी पुल के पूर्व साइड नदी के उत्तरी सीमा में लगभग 400 मीटर लंबाई 20 मीटर चौड़ाई एवं 1 मीटर गहराई का रेत उत्खनन और परिवहन किया जा चुका है। मौके स्थल पर बड़े-बड़े वाहनों के पहिए के निशान रेत और मिट्टी में देखे गए जिससे साबित होता है कि कई जेसीबी मशीनों से रेत उत्खनन कर बड़े वाहनों से परिवहन किया जाता है जिनमें कुछ वाहनों से डायरेक्ट सप्लाय की जाती है जबकि काफी मात्रा में ग्राम परसिली में रेत भंडारित की जाती है जहां से दिनदहाड़े बड़े-बड़े हाईवे वाहनों में जेसीबी मशीन से लोडिंग कर फर्जी कागजात के आधार पर सप्लाई की जाती है।

सहायक परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा समय रहते दी गई है जानकारी

मामले को लेकर सहायक परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा साफ तौर पर कहा गया कि यह सही बात है कि वन सीमा से सड़क बनाकर रेत का कारोबार किया जा रहा है जिसको लेकर उनके द्वारा लिखित और मौखिक जानकारी परिक्षेत्र कार्यालय मझौली को कई बार दी जा चुकी है जबकि वनरक्षक बीट चमराडोल रमेश कुमार विश्वकर्मा के द्वारा भी यह स्वीकार किया गया कि जंगल सीमा में सड़क बनाकर रेत का कारोबार किया जा रहा है जिसको लेकर उनके द्वारा जेसीबी मशीन से एक दो जगह बनी सड़क में गड्ढा खुदाई कराया गया है।

चौकाने वाला है परिक्षेत्राधिकारी का बयान

मामले को लेकर सबसे जिम्मेदार परिक्षेत्र अधिकारी मझौली नीलेश द्विवेदी का चौंकाने वाला बयान है क्योंकि उनके द्वारा पूरे मामले से अपने को अंजान बताने का प्रयास किया गया और कहा गया कि आप फोटो विजुअल भेजिए तब तहकीकात कराई जाएगी जबकि मौका स्थल से यह स्पष्ट होता है कि रेत का कारोबार एक माह पूर्व से चल रहा होगा।

औपचारिकता में सिमटा खनिज विभाग का दौरा

सूत्रों की माने तो 8 जनवरी को मझौली तहसील अंतर्गत खनिज विभाग के टीम का दौरा हुआ था लेकिन इतने बड़े उत्खनन एवं परिवहन के मामले में ना तो कोई संज्ञान लिया गया और ना ही जांच कार्रवाई की गई ऐसे में यही कहा जा सकता है कि खनिज विभाग का दौरा भी औपचारिकता में सिमट गया।

रात में काफी तेज रफ्तार में रेत लोड छोटे बड़े वाहन निकलते हैं जिससे बड़ा खतरा बना रहता है कि कब किसका एक्सीडेंट हो जाएगा। वाहनों की आवाज से रात में नींद भी नहीं आती है इस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए।

मोहन यादव ग्रामीण

मेरा खेत बनास नदी के किनारे ही है यहां से काफी मात्रा में छोटे-बड़े वाहनों से रेत उत्खनन और परिवहन किया जाता है यह साफ तौर पर दिख भी रहा है।
रामफल बैगा ग्रामीण

रेत वैद्य रूप से सप्लाई होता है अथवा अवैध यह तो हमें नहीं है पता लेकिन रेत वाहनों की स्पीड बहुत रहती है जिससे खतरा बना रहता है और ग्रामीणों को भी महंगे रेट पर ही रेत दी जाती है।

जमुना कोल ग्रामीण

यह सही बात है जंगल सीमा में सड़क बनाई गई है और बनास नदी से रेत का कारोबार किया जाता है। मेरे द्वारा जेसीबी मशीन से बनी सड़क को दो-तीन जगह से कटाई की गई है।
रमेश कुमार विश्वकर्मा वनरक्षक बीट चमराडोल

वन सीमा में सड़क बनाई गई है और बनास नदी से रेत का कारोबार हो रहा है जिसको लेकर मेरे द्वारा कई बार रेंज कार्यालय मझौली में मौखिक एवं लिखित सूचना दी जा चुकी है।
जी एन सिंह सहायक परिक्षेत्र अधिकारी

मामला मेरे संज्ञान में नहीं है पता करने पर जानकारी मिली है कि कुछ दिनों तक रेत निकासी हुई है लेकिन अब बंद कर दिया गया है। आप फोटो एवं विजुअल भेजिए तो तहकीकात की जाएगी।
नीलेश द्विवेदी परिक्षेत्राधिकारी वन परिक्षेत्र मझौली

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