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जंगल से लकड़ी लाने को मजबूर आदिवासी कन्या आश्रम कुशमी की छात्राएं

जंगल से लकड़ी लाने को मजबूर आदिवासी कन्या आश्रम कुशमी की छात्राएं

-आधुनिक युग में कर रही प्राचीन गुरुकुल के नियमों का पालन

सीधी-बच्चों में शिक्षा की ललक जगाने के लिए जहां एक ओर सरकार कई योजनाएं चला रही हैं, आदिवासी छात्रों के पठन-पाठन रहने खाने के लिए सरकार ने सभी इंतजाम किए हैं बावजूद इसके वनांचल क्षेत्र कुशमी में स्थित कन्या आश्रम कि छात्राएं जंगल से आश्रम में खाना बनाने के लिए लकड़ी लाने को मजबूर है। घरों से पढ़ने के लिए आई इन छात्राओं का भविष्य अधर में दिखाई पड़ रहा है।


बता दे कि सीधी जिले के वनांचल क्षेत्र कुशमी से एक दुखद खबर सामने आई है जहां हॉस्टल अधीक्षिका द्वारा छात्राओं से जंगल से लकड़ी मंगवाई जा रही है, और इस लकड़ी से खाना बनवाया जा रहा है। जी हां प्राप्त जानकारी के अनुसार आदिवासी कन्या आश्रम कुसमी की अधीक्षिका ममता सिंह पर आरोप है कि इनके निर्देश पर आश्रम की छात्राएं घने जंगल से लकड़ी काटकर उन्हें सर पर रखकर आश्रम लेकर जाती हैं और फिर इन्हीं लकड़ी से उनके लिए भोजन बनता है। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि छोटी छोटी बच्चियां सर पर भारी लकड़ी के गठ्ठे रखकर आश्रम की ओर जा रही है। पूछने पर डरते हुए उनके द्वारा बताया गया कि आश्रम के लिए लकड़ी लेकर जा रहे हैं और अधीक्षिका मैडम द्वारा यह कहा गया है, उन्होंने यह भी बताया कि हम अक्सर लकडियाँ लेकर जाते हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि पठन-पाठन के उद्देश्य से अपने घरों से आई इन छात्राओं से अधीक्षिका द्वारा इस तरह का कार्य कराया जा रहा है। पढ़ने की उम्र में इनसे बेगारी कराई जा रही है। जबकि इनके रहने खाने और पठन-पाठन के साथ समस्त सुविधाएं हॉस्टलों में सरकार द्वारा मुहैया कराई जाती हैं लेकिन छात्राओं की माने तो अधीक्षिका द्वारा उनसे अपने घर का काम भी कराया जाता है। संक्षेप में यदि कहें तो कुसमी की यह छात्राएं प्राचीन समय के गुरुकुल के नियमों का पालन कर रही हैं और हॉस्टल के लिए जंगल से लकड़ी लेकर जा रही हैं ।
गौरतलब है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आश्रम और हास्टल संचालित किए गए हैं। आश्रम शालओं में रहने वाले छात्र एवं छात्राओं को निशुल्क आवास हेतु भवन, बिजली एवं पानी, फर्नीचर, बिस्तर सामग्री, खेलकूद एवं अन्य आधार भूत सुविधाएं उलपब्ध करायी जाती है। निशुल्क भोजन एवं शिष्यवृत्ति प्रदाय की जाती है और इनकी देखरेख के लिए अधीक्षक नियुक्त किए गए हैं लेकिन जिले में समय समय पर ऐसी खबरें सामने आती रहीं हैं जिससे तैनात अधीक्षकों की पोल खुलकर सामने आ जाती है। कही अधीक्षक शराबखोरी में मस्त है तो कहीं उनकी अनुपस्थिति में छात्रों से मारपीट हो रही है और अब आश्रम कि छात्राओं का लकड़ी ढोने की भी खबर सामने आ गई। हालांकि जांच के नाम पर अधिकारी दौरे करते हैं लेकिन छात्रों कि बात अधिकारियों के कान तक पहुँच ही नहीं पाती।

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