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मध्य प्रदेश सरकार की पार्वती, कालीसिंध और चंबल परियोजना: 22 नए बांधों से मिलेगा लाखों लोगों को लाभ

मध्य प्रदेश सरकार की पार्वती, कालीसिंध और चंबल परियोजना: 22 नए बांधों से मिलेगा लाखों लोगों को लाभ

भोपाल, 23 नवम्बर: मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पार्वती, कालीसिंध और चंबल (पीकेसी) परियोजना के तहत 22 नए बांधों का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना से प्रदेश के 13 जिलों को सीधे लाभ मिलेगा, जिनमें मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड, श्योपुर समेत अन्य जिले शामिल हैं। यह परियोजना न केवल जल संकट को हल करेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

परियोजना का उद्देश्य और लाभ
इस परियोजना के तहत बनने वाले 22 बांधों से सिंचाई, जल आपूर्ति और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादन में सुधार होगा। साथ ही, औद्योगिक क्षेत्र वाले जिलों जैसे इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास और राजगढ़ में औद्योगिकीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। इन जिलों में उद्योगों के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

प्रारंभिक और द्वितीय चरण में काम
इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में 13 बांधों का निर्माण किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में 9 बांधों का निर्माण होगा। दोनों चरणों का काम एक साथ शुरू किया जाएगा, और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस परियोजना की समीक्षा बैठक जल्द ही करेंगे। यह परियोजना पांच वर्षों में पूरी होने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें मध्य प्रदेश में करीब 35 हजार करोड़ रुपये का निर्माण कार्य होगा।

केंद्र सरकार का सहयोग
इस परियोजना को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार 90 प्रतिशत राशि का वहन करेगी, जबकि मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्यों को अपनी-अपनी सीमा में बनने वाले प्रोजेक्ट की लागत का सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा देना होगा। इस सहयोग से परियोजना की लागत कम हो जाएगी और इसे समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। अनुमान है कि इस परियोजना की कुल लागत लगभग 75 हजार करोड़ रुपये होगी।

जल बंटवारे से मिलेंगे नए अवसर
पार्वती, कालीसिंध और चंबल नदियों के जल बंटवारे में किए गए समझौते से दोनों राज्यों के लाखों किसानों का जीवन बेहतर होगा। मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसान इस परियोजना से सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। इससे सिंचाई की क्षमता बढ़ेगी, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। इसके अलावा, पर्यटन और उद्योग क्षेत्र में भी विकास के नए द्वार खुलेंगे, और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

महत्वपूर्ण जल परियोजना
इस परियोजना का हिस्सा बनने वाले प्रमुख बांधों में गांधी सागर बांध की अपस्ट्रीम में चंबल, शिप्रा और गंभीर नदियों पर प्रस्तावित छोटे बांध शामिल हैं। इससे जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन होगा और इन नदियों के जल का अधिकतम उपयोग किया जा सकेगा। परियोजना के तहत बनने वाले इन बांधों का जल बंटवारा दोनों राज्यों के लिए फायदेमंद साबित होगा, और इससे पूर्वी राजस्थान और उत्तरी मध्य प्रदेश के जिले लाभान्वित होंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान
यह परियोजना पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू किए गए “नदी जोड़ो अभियान” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्ष 2003 में शुरू हुई नदी जोड़ो योजना, जो कुछ कारणों से लंबित रही, अब दोनों राज्यों के बीच समझौते के बाद फिर से सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस परियोजना को लेकर कहा कि यह दोनों राज्यों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय है और इसका क्रियान्वयन जल प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास के लिए अहम साबित होगा।

समग्र विकास की दिशा में एक कदम
मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच इस जल बंटवारे के निर्णय से क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक नया मोड़ आएगा। इस परियोजना के माध्यम से जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग होगा और क्षेत्रीय किसान, उद्योगपति और आम नागरिक सभी लाभान्वित होंगे। जल संकट, सिंचाई की समस्याएं और पेयजल की कमी जैसी समस्याओं का समाधान होगा, जिससे प्रदेश का समग्र विकास संभव हो सकेगा।

यह परियोजना मध्य प्रदेश और राजस्थान के लिए न केवल जल संकट के समाधान का माध्यम बनेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास में भी एक मील का पत्थर साबित होगी।

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