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बेलगाम शराब माफिया, प्रशासन की नाकामी से युवाओं का भविष्य खतरे में

सिंगरौली में बेलगाम शराब माफिया, प्रशासन की नाकामी से युवाओं का भविष्य खतरे में

सिंगरौली से विशेष रिपोर्ट

मध्य प्रदेश की ऊर्जा राजधानी सिंगरौली में इन दिनों शराब माफियाओं का आतंक चरम पर है। बैढ़न थाना क्षेत्र से सामने आई तस्वीरे न केवल प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलती हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि कैसे अवैध शराब का कारोबार अब खुलेआम और बेखौफ तरीके से गांव-गांव फैलता जा रहा है।

बाइक पर लदी शराब, कानून का खुलेआम मज़ाक

गांव की गलियों में बिना नंबर की बाइकों पर शराब ढोते युवाओं की तस्वीरें अब आम हो गई हैं। शराब की यह पैकारी अब किसी छुपे हुए अड्डे से नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर दिनदहाड़े हो रही है। स्थानीय समूहों की दबंगई इस कदर बढ़ चुकी है कि विरोध करने वालों को खुलेआम धमकाया और पीटा जा रहा है।

थाने में दर्ज मामला, लेकिन कार्रवाई नदारद

18 अप्रैल 2025 को बिलौजी निवासी रामनरेश शाह ने बैढ़न थाने में शिकायत दर्ज कराई कि प्रिंस गुप्ता, मुन्ना यादव और संजू गुप्ता नामक व्यक्तियों ने शराब बिक्री को लेकर विवाद किया और विरोध करने पर मारपीट की। पुलिस ने इस पर IPC की धारा 115(2) के तहत मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन अब तक न कोई गिरफ्तारी हुई, न ही कोई ठोस कार्रवाई — माफिया बेखौफ हैं, और पुलिस मूकदर्शक।

बिना पहचान के बाहरी लोग चला रहे हैं धंधा

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, शराब बेचने वाले कई लोग बाहरी हैं, जिनकी कोई पहचान या वैध दस्तावेज पुलिस के पास नहीं हैं। इन माफियाओं की सस्ती शराब स्कूली बच्चों और बेरोजगार युवाओं तक पहुंच रही है। यह न केवल एक सामाजिक त्रासदी है, बल्कि आने वाले समय में सिंगरौली की पीढ़ियों को बर्बादी के रास्ते पर धकेलने की पटकथा बनती दिख रही है।

क्या प्रशासन सो रहा है, या फिर मिल गया है माफियाओं से?

सबसे बड़ा सवाल यही उठता है — जब यह सब खुलेआम हो रहा है तो प्रशासन क्या कर रहा है? आबकारी विभाग को जब मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। क्या यह प्रशासनिक उदासीनता नहीं, या फिर किसी गहरे गठजोड़ की ओर संकेत है?

जागरूक नागरिकों की मांग, सख्त कार्रवाई हो

ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है:

  • बाहरी और बिना आईडी वाले लोगों की पहचान कर जिले से बाहर किया जाए।
  • जिस शराब समूह के संरक्षण में यह सब हो रहा है, उस पर कानूनी शिकंजा कसा जाए।
  • स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच हो।

यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो सिंगरौली जल्द ही ऊर्जा की राजधानी से नशे का अड्डा बन सकता है — और इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन और प्रशासन पर होगी।


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