सीधी:कुशमी में हाथियों का तांडव, बुजुर्ग दंपति की गई जान
सीधी: जिले के वनांचल क्षेत्र कुसमी में रविवार देर रात हुई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। ग्राम पंचायत गाजर के चिनगी गांव में जंगली हाथियों के हमले में एक वृद्ध दंपति की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है और विस्थापन नीति को लेकर प्रशासन एवं वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

हाथियों ने घर तोड़कर दंपति को कुचला
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम तिलिया निवासी भैयालाल यादव (60 वर्ष) पिता लालमन यादव एवं उनकी पत्नी रविवार रात लगभग 2 बजे अपने घर में सो रहे थे। इसी दौरान हाथियों का झुंड गांव में पहुंच गया। बताया जा रहा है कि हाथियों ने घर को घेर लिया और मकान को क्षतिग्रस्त करते हुए दोनों वृद्ध दंपति को कुचल दिया। हमले में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। सुबह होते-होते क्षेत्र में भारी भीड़ एकत्रित हो गई।
विस्थापन से वंचित था मृतक परिवार

ग्रामीणों का आरोप है कि मृतक परिवार लंबे समय से हाथियों के प्रभावित क्षेत्र में निवास कर रहा था, लेकिन उसे अब तक विस्थापन योजना का लाभ नहीं मिल पाया था। ग्रामीणों के अनुसार गांव के करीब 40 लोग ऐसे हैं जिन्हें विस्थापन की प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि हाथियों के लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए कई बार प्रशासन एवं वन विभाग को आवेदन दिए गए। यहां तक कि एसडीएम कार्यालय में भी विस्थापन की मांग को लेकर आवेदन प्रस्तुत किए गए थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
तुकड़ों में विस्थापन पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा गांव के कुछ परिवारों को तो विस्थापित कर दिया गया, जबकि कई परिवारों को योजना से बाहर रखा गया। इसके कारण पूरा गांव खाली नहीं हो पाया और मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति बनी रही।
कुछ ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उचित मुआवजा नहीं मिलने के कारण कई परिवार विस्थापन के लिए तैयार नहीं हो सके। ऐसे में अधूरी और तुकड़ों में की गई विस्थापन प्रक्रिया अब एक बड़े सवाल के रूप में सामने खड़ी हो गई है।
शव उठाने से नाराज ग्रामीणों ने किया इंकार
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया। जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने मृतकों के शवों को उठाने से इंकार कर दिया और प्रशासन से ठोस कार्रवाई एवं प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की।
मौके पर पुलिस, राजस्व और वन विभाग की टीम पहुंच चुकी है। अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे सवाल
लगातार हाथियों के हमलों और पूर्व में हुई घटनाओं के बावजूद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पूरे गांव का समुचित विस्थापन कर दिया जाता तो संभवतः इस दर्दनाक घटना को टाला जा सकता था।
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र से लगे गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष और विस्थापन नीति की प्रभावशीलता पर बहस छेड़ दी है।
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