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Sidhi kreshar news:सीधी में क्रेशर मंडी से लोग परेशान,नियम विरुद्ध संचालित है क्रेशर और खदान….

Sidhi kreshar news:सीधी में क्रेशर मंडी से लोग परेशान,नियम विरुद्ध संचालित है क्रेशर और खदान….

सीधी- सीधी जिले का बहरी एक ऐसा क्षेत्र है जिसे क्रेशर मंडी के नाम से जाना जाता है यहां दर्जनों क्रेशर संचालित है जिनके द्वारा नियम कायदों का कितना पालन किया जा रहा है यह तो सभी जानते हैं क्रेशर संचालकों द्वारा मनमानी तौर से क्रेशर संचालित किया जाता है और लंबी चौड़ी खदानों से पत्थर की निकासी की जाती है जिन क्षेत्रों से पत्थर निकल जा रहे हैं वहां का दृश्य देखकर बड़ा आश्चर्य और भय की स्थिति उत्पन्न होती है।

क्रेशर संचालकों कि मनमानी का आलम यह है कि इन क्रेसर मशीनों से निकलने वाला धूल धुआं क्षेत्र में निवासरत लोगों को परेशान और बीमार कर रहा है धूल के रूप में निकली दूषितहवा सांसों में घुलकर दमा जैसी जानलेवा बीमारियों को निमंत्रण देती नजर आती है।
बहरी क्षेत्र में कई वैध और अवैध खदाने है जहां से ढोका पत्थर की निकासी कर क्रेशर में उपयोग किया जाता है सूत्रों की माने तो इन पत्थरों को निकालने के लिए ब्लास्टिंग का सहारा भी लिया जाता है जिससे आसपास के रह वासियों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है संचालित अवैध खजाने इतनी गहरी और खतरनाक है कि इनमें कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है लेकिन इस और ना तो संचालकों का ध्यान है और ना ही शासन प्रशासन का बात करें खदानों की लीज की तो यहां पर लगे बोर्ड कुछ आदि कहानी कहते हैं लगे बोर्ड के अनुसार खदान की लिस्ट खत्म हो चुकी है अब या तो खदान संचालक द्वारा बिना लीज के उत्खनन कराया जा रहा है या की बोर्ड में जानकारी अपडेट नहीं है। इइसी तरह के तमाम खदानों के हाल हैं

अवैध खनिज कारोबारियों पर आज तक कोई खास कार्रवाई नहीं की गई। जिसका परिणाम रहा कि आज की स्थिति में नियम विरुद्ध क्रेशर मशीनें संचालित हैं और प्रशासन की अनदेखी में अवैध कारोबार फलफूल रहा है।

नियम कायदों को तक पर रखकर चल रही क्रेशर मशीनें जहां क्षेत्र की आबोहवा प्रदूषित कर ररही है वहीं धरती की कोख को छलनी कर रही हैं। सीधी जिले के बहरी, मयापुर, डढ़िया समेत पूरे क्षेत्र में क्रेशर और खदानों कि भरमार है। इन क्षेत्र में इन दिनों नियम कानून को ताक में रखकर खनिज विभाग की सह पर क्रेसर मशीनें चल रही है जबकि जनता की माने तो इनके संचालकों के पास न तो विभागीय व पर्यावरण प्रदूषण की अनापत्ति है और न ही निर्धारित नियम का पालन किया जाता। फिर भी खनिज विभाग के आला अधिकारियों के सहपर अवैध खदानें संचालित है।

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