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जिला पंचायत का हाल बेहाल, विभागों में लटकते है ताले, अघोषित अवकाश जैसे हालात…

जिला पंचायत का हाल बेहाल, विभागों में लटकेंगे ताले, अघोषित अवकाश जैसे हालात
– लापरवाही उजागर, ठंड का भी शुरू है असर

विभागों में लटकते मिले ताले

जिला पंचायत सीधी में मंगलवार को अघोषित अवकाश जैसे हालात देखने को मिले। यहां पर सायं 3.30 बजे अधिकांश विभागों में ताले लटके हुए थे। अधिकारी, कर्मचारियों के वजाय कुछ विभागों में खाली कुर्सियां कार्यालय की शोभा बढ़ा रही थीं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला पंचायत कार्यालय में अधिकारी, कर्मचारी कितनी ईमानदारी से अपनी सेवा दे रहे हैं। और तो और इनके बारे में जानकारी लेने यहां पर जिम्मेदार भी नहीं मिले। कुल मिलाकर इन दिनों जिला पंचायत कार्यालय में लापरवाही व मनमानी का आलम है। जिसके चलते शासन की महत्वपूर्ण योजनाएं व विकास के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
गौरतलब है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास का मूल कहे जाने वाले जिला पंचायत में करीब दर्जन भर विभाग संचालित होते हैं। यहाँ जिला पंचायत को विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक कार्य प्रदान करने और अधिनियम की अनुसूची के अनुसार कुछ विभागों के संबंध में सौंपे गए सरकार के कर्तव्यों की देखभाल करने का काम सौंपा जाता है। लेकिन यहां संचालित कई विभागों में मनमाने तौर पर तालाबंदी कर दी जाती है, कर्मचारी जहां कार्यालय के बाहर बैठकर गप्पे लगाते देखे जाते हैं तो वही अधिकारी अपनी सीट से नदारत दिखते हैं। आज जिला पंचायत में दोपहर बाद कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला यहां संचालित एमडीएम शाखा, वाटरशेड, एसबीएम, सामाजिक आकेक्षण में जहां ताले लटके हुए पाए गए। वही शिकायत सेल और कई अन्य विभागों में महज खाली कुर्सियां ही देखी गई। जानकारी लेने पर पाया गया कि अधिकारी बाहर हैं जबकि अन्य स्टाफ यहीं कहीं आसपास होगे। सरकारी कार्यालय का ऐसा हाल बेहद चिंतनीय और सोच का विषय है। कुछ विभागों में जहां अधिकारी थे वह भी बाहर टहलते पाए गए और जानकारियां चाहने पर इधर-उधर की बात करते देखे गए। जिला पंचायत में बदहाली का आलम यह है कि यहाँ के अधिकतर विभागों में विभाग के बाहर उनका नाम ही नहीं लिखा गया है। महज कक्ष क्रमांक इंगित किया गया है। जिससे यहाँ आने वाले लोगों को बार-बार पूछताछ करनी पड़ती हैं और विभाग मिल भी गया तो अधिकारी, कर्मचारी नहीं मिलते। जिला पंचायत के भीतर पहली मंजिल पर स्थित कक्ष क्रमांक 14 में ताला लटकने पाया गया जहां जानकारी एकत्र करने पर पता चला कि यह एमडीएम शाखा है जिसके प्रभारी अनिल कुमार पटेल है जो कहीं बाहर गए हैं, वही लिपिक बाबादीन कुशवाहा दफ्तर में ताला लगाकर नीचे धूप सेकने गए हुए थे।

मिली खाली कुर्सियां, जिम्मेदार नदारद
इसी प्रकार कक्ष क्रमांक 23 जिसमें वाटरशेड और एसबीएम शाखाएं संचालित होती हैं उनमें भी ताला दिखा अधिकारियों का नाम पूछने पर कोई व्यक्ति ऐसा नहीं मिला जो इसकी जानकारी दे सके। इसी प्रकार कक्ष क्रमांक 23 व 24 में भी ताला देखा गया जहां सामाजिक अंकेक्षण एवं अन्य शाखाएँ लगती हैं। शिकायत सेल में पहुंचने पर पाया गया कि महज एक ऑपरेटर उपस्थित है जिससे अधिकारी के बारे में पूछने पर बताया गया कि बाहर है लेकिन उसे अधिकारी का नाम ही नहीं पता। ग्राउंड फ्लोर पर स्थित कमरों की ओर जब रुख किया गया तो यहां संचालित शिक्षा एवं निर्माण शाखों में केवल कुर्सियां ही दिखाई दी ना अधिकारी, ना बाबू, ना ऑपरेटर और ना ही कोई भृत्य कमरे पूरी तरह से खाली पाए गए। ना तो जिम्मेदार मिले, ना ही जवाबदार मिले। जिला पंचायत का हाल देखकर ऐसा लगा कि या तो ठंड का असर कर्मचारियों पर भी चढ़ रहा है या फिर चुनाव का खुमार अभी उतरा ही नहीं है। पूरे मामले को लेकर जब जिला पंचायत के सर्वेसर्वा सीईओ जिला पंचायत राहुल नामदेव धोटे से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

विभागों में खाली कुर्सियां

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