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आज पेश होगा मोहन सरकार का अंतरिम बजट, देखिए क्या रहेगा खास

आज पेश होगा मोहन सरकार का अंतरिम बजट, देखिए क्या रहेगा खास

भोपाल- मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार का पहला अंतरिम बजट (लेखानुदान) आज पेश किया जाएगा। इसे वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा बजट पेश करेंगे। इस फाइनेंशियल ईयर (2024-25) के पहले तीन महीनों के लिए यह बजट करीब एक लाख करोड़ का होगा। जिसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल, महिला, किसान, आदिवासी और युवाओं को केंद्र में रखकर कई प्रावधान किए जा सकते हैं।

अंतरिम बजट में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने, एक्सप्रेस-वे के निर्माण को गति देने, औद्योगिक केंद्रों के विकास, स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने के लिए संशोधित नीति के अनुरूप अनुदान देने के लिए भी राशि का प्रावधान किया जा सकता है।

हालांकि, सरकार अंतरिम बजट होने के चलते कोई नई घोषणाएं नहीं करेगी। मुख्य बजट लोकसभा चुनाव के बाद जुलाई में मानसून सत्र के दौरान पेश किया जाएगा।

बजट में किस वर्ग पर कितना रहेगा फोकस…

महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना आवास योजना

मध्यप्रदेश सरकार ने तय किया है कि लाड़ली बहनों को आवास उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए फर्स्ट फेज में शहरी क्षेत्र में 1 लाख आवास बनाने का फैसला लिया है। नगरीय विकास व आवास विभाग इसके नियम बना रहा है। सरकार अगले चार महीने के लिए इस योजना को शुरू करने के लिए अंतरिम बजट में राशि रख रही है। अंतरिम बजट में महिला सशक्तिकरण के लिए लाड़ली बहना, महिला स्व-सहायता समूहों को सहायता, विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग की महिलाओं को पोषण आहार भत्ता देने की योजनाओं को निरंतर रखने के लिए राशि का प्रावधान किया जा रहा है।

कर्मचारियों के लिए DA और राहत के लिए 56% के हिसाब से प्रावधान

प्रदेश में अभी कर्मचारियों को 42% की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। केंद्र इसे बढ़ाकर 46 प्रतिशत कर चुकी है। प्रदेश सरकार भी इसे बढ़ाने की तैयारी में है। अंतरिम बजट में आगामी वित्तीय वर्ष में इसे 56 प्रतिशत की दर से करने के लिए राशि का प्रावधान किया जा सकता है। कर्मचारियों के वेतन के लिए औसत 3% और संविदा कर्मचारियों (पारिश्रमिक) के 8% की वृद्धि के लिए बजट में राशि का प्रावधान किया जा रहा है। इसी तरह मजदूरी मद व कार्यालय व्यय (पेट्रोल-डीजल सहित अन्य खर्च) के लिए 5-5% और सुरक्षा, परिवहन व सफाई मद में 10% तक वृद्धि किए जाने की उम्मीद है।

पीएमश्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के लिए 460 करोड़

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शपथ लेते ही अपनी पहली कैबिनेट बैठक में हर जिले में प्रधानमंत्री एक्सीलेंस कॉलेज खोलने का अहम फैसला लिया था। यह स्कीम चुनाव से पहले ही बन गई थी। तब मोहन यादव उच्च शिक्षा मंत्री थे, लेकिन लाड़ली बहना योजना की वजह से इसे रोक दिया गया था। अब लोकसभा चुनाव से पहले इसे लॉन्च किया जा रहा है।

इसके लिए अंतरिम बजट में 460 करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा रहा है। नई शिक्षा नीति के तहत प्रधानमंत्री एक्सीलेंस कॉलेज में सभी प्रकार के कोर्स की पढ़ाई हो सकेगी। मध्यप्रदेश में सरकार कुल 570 सरकारी कॉलेजों में से हर जिले में एक कॉलेज को ‘पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में अपग्रेड करेगी।

मुख्यमंत्री हेली पर्यटन सेवा और एयर एंबुलेंस के लिए प्रावधान

सरकार मुख्यमंत्री हेली पर्यटन सेवा योजना के जरिए प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों के लिए पर्यटकों को हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराएगी। इसी के तहत केदारनाथ धाम की तर्ज पर इंदौर से बाबा महाकाल एवं ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग, जबलपुर से चित्रकूट, ग्वालियर से ओरछा तथा पीतांबरा पीठ के लिए हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करेगी। इसी के साथ सरकार मुख्यमंत्री एयर एम्बुलेंस सेवा शुरू करने जा रही है। दोनों योजनाओं के लिए अंतरिम बजट में राशि का प्रावधान किया जा रहा है।

केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ी, 6500 करोड़ का अतिरिक्त बजट

वित्त विभाग के सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय करों में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ गई है। केंद्र सरकार से मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए प्रदेश को 6500 करोड़ अतिरिक्त मिलेंगे। इसके हिसाब से राज्य के अंतरिम बजट में 1625 करोड़ रुपए की वृद्धि को शामिल किया जा रहा है।

पूंजीगत व्यय को बढ़ाने पर सरकार का जोर

सरकार पूंजीगत व्यय को बढ़ावा भी देगी। अभी 56 हजार 256 करोड़ रुपए का प्रावधान है। इसे 60 हजार करोड़ रुपए से अधिक किया जा सकता है। इसमें सिंचाई परियोजना के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सुधार को प्राथमिकता दी जाएगी। मेडिकल कॉलेजों के निर्माण को गति देने के साथ छोटी सड़कों पर ध्यान दिया जाएगा।

वित्त विभाग के सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार ने देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर को विश्व स्तरीय बनाने के लिए बजट में एक तरफ 11.1% बढ़ोतरी कर इसे रिकॉर्ड 11.11 लाख करोड़ रुपए किया है। इसका सबसे ज्यादा फायदा मध्य प्रदेश को होगा। इसकी वजह यह है कि मप्र का सकल घरेलू उत्पाद पूंजीगत व्यय सबसे अधिक 4.5% है। इस हिसाब से मप्र 56 हजार करोड़ रुपए विकास कार्यों में खर्च करने के लिए कर्ज ले सकता है। लेकिन, अब बजट का साइज बढ़ेगा तो पूंजीगत व्यय भी बढ़ने के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ेगा।

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